पहाड़ पर आफत बनकर बरस रही बारिश
भूस्खलन से कहीं रास्ते टूटे तो कहीं घर और दफ्तर आए खतरे की जद में
गढ़वाल के दरकते पहाड़ों पर बारिश आफत बनकर बरस रही है। भूस्खलन से कहीं रास्ते टूट गए हैं तो कहीं निजी और सरकारी भवन खतरे की जद में आ गए हैं। सड़कें बंद होने के कारण कई गांवों के लोगों को जरूरी सामान पीठ पर लादकर ले जान पड़ रहा है। आए दिन मरीजों को कंधों पर लेकर जाते लोगों की तस्वीरें व्यवस्थाओं की हकीकत बयां कर रही हैं। सालों पहले आपदा में टूटे पुल आज तक नहीं बन पाए हैं। लोग कहीं ट्राली तो कहीं लकड़ी के अस्थायी पुलों के सहारे नदी पार कर रहे हैं।
डेढ़ साल से ट्रॉली में झूल रही 30 परिवारों की जिंदगी
रैणी आपदा के डेढ़ साल बाद भी नीती घाटी के जुआ ग्वाड़ गांव के ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। यहां आपदा के दौरान धौली गंगा पर स्थापित पैदल गार्डर पुल बह जाने के बाद लोनिवि ने जुग्जू और भंग्यूल गांव के ग्रामीणों की आवाजाही के लिए अस्थायी पुलों की व्यवस्था की लेकिन जुआ ग्वाड़ में स्थायी व्यवस्था तक न होने से यहां के ग्रामीणों की जिंदगी आज भी ट्रॉली में झूल रही है। वहीं गांव को जाने वाला पैदल रास्ता भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त है।
जुआ ग्वाड़ गांव में भोटिया जनजाति के 30 परिवार रहते हैं। 7 फरवरी 2021 को रैणी आपदा के दौरान धौली गंगा में बाढ़ आने से जुग्जू, जुआ ग्वाड़ और भंग्यूल गांव को जाने वाले पुल बह गए थे। तब लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड गोपेश्वर ने जुग्जू और भंग्यूल गांव के लिए अस्थायी पुलों का निर्माण किया लेकिन जुआ ग्वाड़ गांव के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रॉली लगाई। आज भी ग्रामीण इसी ट्रॉली से आवाजाही करते हैं। ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह राणा और सुनील नौटियाल का कहना है कि आवाजाही का साधन न होने के कारण ग्रामीणों को शादी, समारोह से लेकर बच्चों के मुंडन तक के लिए जोशीमठ जाना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बावजूद विभागीय कार्रवाई पुलों के स्टीमेट बनाने तक ही सीमित है।
इधर, लोनिवि के ईई सुरेंद्र पटवाल ने बताया कि धौली गंगा पर तीन पुलों के निर्माण का स्टीमेट शासन को भेजा गया है। बजट मिलने पर पुलों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
जरूरी सामान पीठ पर लादकर ले जा रहे ग्रामीण
चमोली जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की 45 सड़कें भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से बंद हैं। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग गोपेश्वर की 7, प्रांतीय खंड कर्णप्रयाग की 8, पीएमजीएसवाई कर्णप्रयाग की 10, पीएमजीएसवाई (लोनिवि) पोखरी की छह सड़कें कई दिनों से बंद हैं जिससे ग्रामीण को लंबी दूरी तक जरूरी सामग्री पीठ पर लादकर जाना पड़ रहा है।
ईराणी गांव के पूर्व प्रधान मोहन सिंह नेगी का कहना है कि भूस्खलन से पैदल रास्ते भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। वीर गंगा पर पैदल पुलिया बह जाने से और निजमुला सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को करीब 14 किलोमीटर तक पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। जरूरी सामग्री को ग्रामीण पीठ पर लादकर ले जा रहे हैं। वहीं उमट्टा-मौणा, चमोली-पलेठी-सरतोली, गडोरा-अमरपुर-रैतोली, पुरसाड़ी-पलेठी, बगोली-कोटी, धुर्मा कुंडी-नंदानगर, घाट-उस्तोली-सरपाणी सड़क भी बंद हैं।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी लगाई गई है। बार-बार बारिश होने से खोली गई सड़कें दोबारा बाधित हो रही हैं। सड़कों को शीघ्र सुचारु करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बिजली लाइन भी टूटी
गैरसैंण के स्यूणी मल्ली गांव में बिजली लाइन भी क्षतिग्रस्त पड़ी है। वहीं थराली में 33 केवी की बिजली लाइन के क्षतिग्रस्त होने से थराली और देवाल क्षेत्र के दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली सप्लाई ठप पड़ी है। संवाद
सिरोली के पास दरकी चट्टान, लगा जाम
कर्णप्रयाग-रानीखेत हाईवे पर सिरोली के पास पहाड़ी से चट्टान खिसकने से दोपहर बाद देर शाम तक हाईवे बंद रहा। हाईवे बंद होने से गैरसैंण, आदिबदरी, सिमली, कर्णप्रयाग जाने वाले करीब 80 वाहन देर शाम तक सिरोली में फंसे रहे। साथ ही कई लोग आदिबदरी की तरफ से बेनीताल मेले में जा रहे थे लेकिन हाईवे बंद होने के कारण वे वहीं फंसे रहे।
मंगलवार दोपहर एक बजे रानीखेत हाईवे पर सिमली और सिरोली के बीच हाईवे पर चट्टान दरक गई जिससे हाईवे बंद हो गया। हाईवे बंद होने की सूचना लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। सूचना पर काफी देर बाद एनएच की स्टोन कटर और जेसीबी मौके पर पहुंची और बोल्डर हटाने शुरू किए गए। एनएच के जेई डीएस चौहान ने बताया कि देर शाम साढ़े सात बजे हाईवे छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया। हाईवे बड़े वाहनों के लिए आवाजाही खोलने का प्रयास जारी है।
वहीं, कर्णप्रयाग-ग्वालदम हाईवे भी नारायणबगड़ के पास मौणा छीड़ा में करीब पांच घंटे बंद रहा। यहां सुबह चार बजे हाईवे चट्टान दरकने से बंद हो गया था जिसे नौ बजे खोल दिया गया। इस दौरान कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, देहरादून, नारायणबगड़, थराली, देवाल, ग्वालदम जाने वाले वाहन मौणा छीड़ा में फंसे रहे।
बमोथ में मकान पर गिरा पेड़, कर्णप्रयाग में मकानों को खतरा
सोमवार रात को हुई बारिश के कारण बमोथ गांव में पेड़ गिरने से गौरव पुरोहित का मकान क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की मांग की। वहीं कर्णप्रयाग में मंडी परिषद के नीचे भूस्खलन होने से सब्जी मंडी के अलावा आसपास के मकानों को खतरा बना है। बीपी सती, बृजेश बिष्ट, ईश्वरी मैखुरी आदि ने एसडीएम से मुलाकात कर भूस्खलन वाले क्षेत्र का ट्रीटमेंट करने, सड़क किनारे नालियां बनाने व सड़क किनारे पड़े मलबे को हटाने की मांग उठाई है।
वहीं बारिश से बदरीनाथ हाईवे से सटा पैदल रास्ता उमराकोट-बैडाणू क्षतिग्रस्त होने से ल्वाली, बडेत, बेडाणू, ढुंग, जेंटी, भटकोटी गांवों के सैकड़ों लोगों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं। ग्राम प्रधान स्मिता देवी, सरपंच शिवप्रसाद सती ने एसडीएम को पत्र देकर क्षेत्र का निरीक्षण कर रास्ते के निर्माण की मांग उठाई। संवाद
कनखुल से आगे मार्ग बंद
कर्णप्रयाग-नैनीसैंण मार्ग कनखुल से आगे तीन दिनों से बंद पड़ा है। साथ ही कनखुल-ग्वाड़ सड़क पर 14 दिन से मलबा आने से वाहनों की आवाजाही बंद है। कपीरी क्षेत्र के रणबीर कंडवाल, भगवान कंडवाल, राजेंद्र नेगी आदि ने लोनिवि व पीएमजीएसवाई के अधिकारियों से जल्द जेसीबी भेजकर सड़क खुलवाने की मांग की। संवाद
छिनका में अतिवृष्टि से घरों व गोशालाओं में घुसा मलबा
अगस्त्यमुनि ब्लॉक के तल्लानागपुर के ग्राम पंचायत छिनका में सोमवार देर रात अतिवृष्टि से दो मकानों व कई गोशालाओं में मलबा घुस गया। ग्रामीणों की सैकड़ों नाली खेतों में फसल बर्बाद हो गई। गांव की सिंचाई नहर, पेयजल लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई है। प्रशासन ने प्रभावित दो परिवारों को अन्यत्र शिफ्ट कर खाद्य व राहत सामग्री दी।
सोमवार देर रात बारिश से छिनका गांव के बस्ती क्षेत्र में अतिवृष्टि हुई। घरों के पीछे से मलबे व बोल्डरों की तेज आवाज सुनकर ग्रामीण विजय लाल शोर मचाते हुए घर से बाहर आए तो अन्य लोग भी जाग गए। इस दौरान विजय लाल व राहुल लाल के घरों व गांव के अन्य लोगों के खेतों, गोशालाओं में मलबा घुस गया। मंगलवार को जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार, तहसीलदार मंजू राजपूत, राजस्व उप निरीक्षक छिनका गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों की मदद की। इस दौरान प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया गया।
तहसीलदार मंजू राजपूत ने बताया कि बस्ती क्षेत्र की पेयजल लाइन को दुरुस्त करने के लिए जलसंस्थान को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही घरों में घुसे मलबे की सफाई के लिए पीएमजीएसवाई को कहा गया है। इधर, जिला पंचायत अध्यक्ष सुमंत तिवारी ने भी छिनका पहुंचकर प्रभावित परिवारों की कुशलक्षेम पूछी। उधर, दशज्यूला कांडई के महड़ गांव में बिजली गिरने से गोशाला में बंधी एक भैंस व दो बकरियां मर गई। दो घोड़े अंधे हो गए। गांव पहुंचकर राहत दल ने प्रभावित पशुपालकों को जरूरी मदद दी।
भूस्खलन से वीडीओ दफ्तर सहित कई आवास खतरे में
विकासखंड मोरी के जखोल गांव में सड़क निर्माण के कारण हो रहे भारी भूस्खलन से ग्राम विकास अधिकारी कार्यालय सहित कई मकान खतरे की जद में हैं। भूस्खलन क्षेत्र में बिना बारिश के पत्थर गिर रहे हैं।
जखोल गांव में राजकीय इंटर कालेज भवन का निर्माण किया जा रहा है। भवन के निर्माण के लिए ठेकेदार ने नेस्ताड़ी से निर्माण स्थल तक लगभग एक किमी सड़क का निर्माण किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा यहां सिर्फ सड़क कटिंग की गई, दीवार नहीं बनाई गई है। इससे गांव के ऊपर भारी भूस्खलन होने से ग्राम विकास अधिकारी कार्यालय सहित कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है। गांव के किशन सिंह रावत ने बताया कि मार्ग के निर्माण से जखोल मोटर मार्ग के 16 किमी हिस्से में भूस्खलन हो रहा है।
लोनिवि के सहायक अभियंता सुनीत सिंह ने बताया कि यह मार्ग लोनिवि का नहीं है। जल निगम चंबा टिहरी ने मार्ग को बनाया है लेकिन कार्यदायी संस्था द्वारा यहां डंपिंग जोन न बनाने से कटिंग का मलबा लोनिवि की सड़क पर आ रहा है। लोनिवि को बार-बार यहां जेसीबी लगानी पड़ रही है। कार्यदायी संस्था द्वारा यहां एक बरसाती खड्ड को भी बंद कर दिया गया है जिससे खड्ड के पानी से लोनिवि की सड़क पर भारी कटाव हो रहा है। लोनिवि ने करीब 10 लाख की क्षतिपूर्ति के लिए कार्यदायी संस्था को पत्र भेजा है।
स्योरी पैदल मार्ग पर भूधंसाव दे रहा दुर्घटना को न्योता
विकासखंड नौगांव के डांडा गांव क्षेत्र के एक दर्जन गांव को जोड़ने वाले स्योरी पैदल मार्ग पर जगह-जगह हो रहे भू-धंसाव और मार्ग पर बने गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। वर्ष 2020 की आपदा की भेंट चढ़ने के बाद पैदल मार्ग पर आज तक कोई सुरक्षात्मक कार्य नहीं हो पाए हैं।
एक दशक पहले सड़क नहीं होने पर डंडा गांव क्षेत्र के मटियाली, बिंगसी, नैणी, पिसाऊं, किम्मी, रस्टाड़ी, कंडाऊं, धारी, देवलसारी और स्योरी के लोगों के पास मुख्य बाजार तक पहुंचने के लिए यही रास्ता एक विकल्प था। अब स्थिति यह है कि प्रत्येक वर्ष की आपदा में इस पौराणिक पैदल मार्ग की स्थिति बदतर होती जा रही है। नौगांव स्थित सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने पहुंच रहे गांवों के करीब 150 से अधिक बच्चे प्रत्येक दिन इसी रास्ते से जोखिमभरी पैदल आवाजाही कर रहे हैं। कंडाऊं की पूर्व प्रधान सुनीता नौटियाल का कहना है कि पैदल मार्ग से रोजाना अलग-अलग गांव के डेढ़ से ज्यादा छात्र स्कूल पहुंचने के लिए आवाजाही कर रहे हैं। पैदल मार्ग की स्थिति इतनी खराब है कि कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है।