स्वयंभू सोशल फाउंडेशन की ओर से नाट्य चेतना बोर्ड के कलाकारों ने बणों की रामलीला... नाटक के माध्यम से लोगों को जंगलों की रक्षा के लिए जागरूक किया। उन्होंने प्रकृति की महत्ता को बताते हुए कन स्वाणी उत्तराखंड भूमि, कन स्वाणी बोंणू की हरियाली..., यूं बौंण हमारा यूं डाली हमारी... सहित कई गीत गाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
ब्लॉक सभागार में आयोजित कार्यक्रम में फाउंडेशन के सलाहकार पीके मोहंती ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाओं से प्रतिवर्ष हजारों पेड़-पौधे जल जाते हैं। साथ ही जंगलों में रहने वाले पशु-पक्षियों और प्राकृतिक जलस्रोतों को भी नुकसान पहुंचता है। फाउंडेशन का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ चीड़ की जगह चौड़ी पत्ती वालों पौधों पर जोर देने का है। कहा कि 13 से 19 जून तक कर्णप्रयाग ब्लॉक के 14 गांवों मैखुरा, सिलंगी, तोप, रतूडा, घंडियाल, सिमतोली, नागकोट, कनखुल तल्ला, ऐंड, बौंला, जाख, नौटी, चूला, गबनी गांव में भी नाटक के जरिए वन संरक्षण व वनाग्नि रोकने के लिए कार्यक्रम कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान पूर्व में पर्यावरण संरक्षण पर हुई प्रतियोगिता में प्रथम स्थान रही सोनिया, द्वितीय रही प्रतिभा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली खुशबू को सम्मानित किया गया। इस दौरान रूपा, सोनी, मनीषा, साक्षी, प्रियंका, अक्षत, राहुल, अरुण, सचिन, सूरज, पवनेश, विश्वरंजन, संगीता, आदित्य, रोशन आदि ने नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति दी।