फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घांघरिया की खूबसूरती को लील रहा घोड़े-खच्चरों का मलमूत्र

विज्ञापन
विज्ञापन
फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की यात्रा के प्रमुख पड़ाव घांघरिया में घोड़े-खच्चरों की लीद के कारण तेजी से पेड़ पौधे सूख रहे हैं। वहीं घोड़े-खच्चर अधिक होने के कारण अब घोड़ा-खच्चर संचालकों ने कई अन्य जगहों पर भी घोड़ा पड़ाव बनाना शुरू कर दिया है, जो यहां की जैव विविधता को भी समाप्त कर रहा है।
विज्ञापन

हेमकुंड साहिब की यात्रा और फूलों की घाटी के सैर-सपाटे के दौरान घांघरिया पड़ाव पड़ता है। घांघरिया में इमारती लकड़ी रागा और देवदार के ऊंचे-ऊंचे पेड़ हैं और यहां दूर-दूर तक फैला घना जंगल है। घांघरिया के शुरुआत में ही घोड़ा पड़ाव स्थित है। यहां यात्राकाल में चार से पांच हजार घोड़े-खच्चरों को रुकवाया जाता है, लेकिन यहां घोडे़-खच्चरों की लीद और मूत्र की निकासी न होने से दलदल जैसी स्थिति बनी रहती है। इससे घोड़ा-पड़ाव के आसपास खड़े रागा और देवदार के पेड़ सूख रहे हैं। भ्यूंडार के पूर्व जिला पंचायत सदस्य भवान सिंह चौहान का कहना है कि पूर्व में घोड़ा पड़ाव पर लीद और मूत्र से दो से तीन फीट तक दलदल बना रहता था। बाद में ईडीसी (पर्यावरण विकास समिति) की ओर से यहां मिट्टी का भरान किया गया, लेकिन अब फिर से दलदल की स्थिति पैदा हो गई है। घांघरिया की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए कांजिला के समीप ही घोड़ा-खच्चर पड़ाव बनाया जाना चाहिए।
घांघरिया में कई औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं और यहां दुर्लभ पेड़ पौधे हैं। घोड़े-खच्चरों के लीद और मूत्र में काफी मात्रा में नाइट्रोजन होता है, जो आसपास की वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाता है। यही कारण हो सकता है कि यहां घोड़ा पड़ाव में पेड़ सूख रहे हैं। पड़ाव में लीद और मूत्र की निकासी के समुचित इंतजाम किए जाने चाहिए। - डॉ. प्रियंका उनियाल, वनस्पति विज्ञानी, पीजी कॉलेज गोपेश्वर, चमोली।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें