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Gauchar Mela: सीएम धामी ने किया मेले का शुभारंभ, की आयोजन के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा

Tue, 15 Nov 2022 12:36 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली

सार


मेले में सबसे पहले स्कूली बच्चों की प्रभातफेरी निकाली गई और मेलाध्यक्ष डीएम हिमांशु खुराना ने झंडारोहण कर मार्चपास्ट की सलामी ली। कार्यक्रम में सीएम ने केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
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गौचर में वरिष्ठ पत्रकार रमेश पहाड़ी को सम्मानित करते सीएम पुष्कर धामी। - फोटो : KARNPRYAG
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विस्तार
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रावल देवता पूजन, स्कूली बच्चों की प्रभातफेरी, मांगल गीतों के साथ 70वें राजकीय औद्यौगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले (गौचर मेला) का सोमवार को आगाज हुआ। मेेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया। उन्होंने गौचर मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित करने और गौचर मेले के आयोजन के लिए सरकार की ओर से 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। कहा कि मेले हमारी लोक संस्कृति और सामाजिक सरोकार को बनाए रखने के आधार हैं। हमें अपने पूर्वजों से विरासत में मिले लोकपर्व की इस परंपरा को अगली पीढ़ियों तक बढ़ाने की जरूरत है।

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मेले में सबसे पहले स्कूली बच्चों की प्रभातफेरी निकाली गई और मेलाध्यक्ष डीएम हिमांशु खुराना ने झंडारोहण कर मार्चपास्ट की सलामी ली। कार्यक्रम में सीएम ने केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। कहा कि हमारा प्रयास रोड, रेल, रोपवे, हवाई कनेक्टिविटी और सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाकर उत्तराखंड को 2025 तक देश के श्रेष्ठतम राज्य के रूप में खड़ा करना है। इसके साथ ही उन्होंने गौचर स्वास्थ्य केंद्र का सीएचसी में उच्चीकरण और चार अन्य मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। इस मौके पर विधायक अनिल नौटियाल, भूपालराम टम्टा, शैलारानी रावत, भरत सिंह चौधरी, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिलाध्यक्ष रमेश मैखुरी, पालिका अध्यक्ष अंजू बिष्ट, व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल, नवीन टाकुली, पूर्व पालिका अध्यक्ष मुकेश नेगी, कांग्रेस नगर अध्यक्ष सुनील पंवार आदि मौजूद थे।

तीन हजार नर्सिंग स्टाफ की होगी नियुक्ति
गौचर/रुद्रप्रयाग। गौचर मेले में स्वास्थ्य मंत्री डा. धनसिंह रावत भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तीन हजार नर्सिंग स्टाफ, एक हजार एएनएम, तीन सौ डाक्टर और पांच हजार शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति करेगी। वहीं रुद्रप्रयाग जिले के कोठगी में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग में 23 करोड़ की लागत से 50 बेड का क्रिटिकल केयर सेंटर बनाया जाएगा। प्रदेश में बेसिक से माध्यमिक तक चार हजार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, जिसमें 1500-1500 सहायक शिक्षक व प्रवक्ता और 1000 बेसिक शिक्षक शामिल हैं।
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वरिष्ठ पत्रकार रमेश गैरोला को किया सम्मानित
गौचर। कार्यक्रम में सीएम ने मेले के संस्थापक पत्रकार स्व. गोविंद प्रसाद नौटियाल की मूर्ति का अनावरण कर माल्यार्पण किया। सीएम ने वरिष्ठ पत्रकार रमेश गैरोला ‘पहाड़ी’ को गोविंद प्रसाद नौटियाल स्मृति पत्रकार सम्मान से नवाजा। इस मौके पर सीएम ने देवेश जोशी की ओर से ‘कै धूमसिंह चौहान’ पर लिखी पुस्तक का विमोचन भी किया।

मशकबीन की मधुर धुन रही मेले में आकर्षण का केंद्र
गौचर मेले में मशकबीन और बैंड की मधुर धुन मेलार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। जवानों ने पारंपरिक धुन बजाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही गौचर मेला मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक क्रास कंट्री दौड़ हुई। धूमखेल मैदान में बालक एवं बालिकाओं की विभिन्न प्रतियोगिताएं हुईं। मेले में पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति से सजा पंडाल मेलार्थियों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन ने शिक्षकों की समस्याओं, व्यापार संघ अध्यक्ष ने नगर की समस्याओं, कांग्रेस पदाधिकारियों ने पालिका क्षेत्रांतर्गत विभिन्न विकास योजनाओं तथा पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने समस्याओं के समाधान के ज्ञापन सीएम को दिये।

समय के साथ बदला गौचर मेले का रूप
गौचर मेला लगभग 75 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है। पहले यह मेला व्यापार के लिए प्रसिद्ध था मगर समय के साथ मेले का रूप बदला और अब से सांस्कृतिक मेले के रूप में मनाया जाता है। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गढ़-कुमाऊं की संस्कृति दिखती है। इन 75 वर्षों से होने वाला गौचर मेला अब 11 बार अलग-अलग कारणों से नहीं हो पाया। गौचर मेला वर्ष 1943 के नवंबर माह में भोटिया व्यापारिक मेले के नाम से शुरू हुआ था जो 1953 तक इसी नाम से चलता रहा। यह मेला उस समय पूर्णतया एक व्यापारिक मेला था। मेले में मुख्यतया तिब्बती ऊन, तिब्बती पश्मीना ऊन, च्यालकू, बकरियां, तिब्बती कालीन, दन, हींग, तिब्बती नमक, कस्तूरा एवं भोटिया चाय का व्यापार होता था लेकिन 1962 में युद्ध के बाद चीन के साथ आए रिश्तों में तनाव के कारण अचानक तिब्बत के व्यापारिक मार्ग बंद हो गए थे। वर्ष 1947 से मेले का आयोजन नवंबर में शुभ तिथि निकालकर किया जाता था। तिब्बत से व्यापार बंद होने के बाद यह मेला औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले के रूप में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर होने लगा। इस मेले को एक बार जिला परिषद चमोली और दो बार टाउन एरिया कमेटी गौचर की ओर से संचालित किया जा चुका है।

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