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स्थानीय बाजार में मिल रहे हैं अच्छे दाम

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जड़ी-बूटी उत्पादन के बाद देवाल ब्लॉक के घेस गांव का सेब ग्रामीणों की आर्थिकी का जरिया बना रहा है। इस साल सेब की अच्छी पैदावार से काश्तकार खुश हैं। घेस गांव का सेब स्थानीय बाजार में हाथों-हाथ बिक रहा है और इसकी डिमांड भी बढ़ रही है। इससे लोगों की आर्थिकी में सुधार आ रहा है। पूरे गांव में 60 से अधिक परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन खेतीबाड़ी के अलावा सेब भी बन चुका है।
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तीन साल पहले उद्यान विभाग ने घेस गांव के काश्तकारों को अच्छी किस्म के सेब के पौधे दिए थे। 60 से अधिक परिवारों ने अपने खेतों में सेब के पौधे लगाए। अब सेब तैयार हो चुका है और देवाल, थराली, नारायणबगड़ और कर्णप्रयाग सहित आसपास के बाजारों में पहुंच गया है। काश्तकार कुंदन सिंह, केशर बिष्ट, हुकम सिंह, बलवंत सिंह, अर्जुन सिंह, बीरेंद्र सिंह, प्रेम सिंह आदि ने बताया कि इस साल सेब में ज्यादा मिठास है और बाजार में भी अच्छे दाम मिल रहे हैं। सेब उत्पादन से काश्तकार हर महीने लगभग पंद्रह हजार रुपये कमा रहे हैं जबकि एक सीजन में लगभग ढाई लाख की आमदनी हो रही है। सरपंच कुंदन भंडारी ने कहा कि उन्होंने भी अपने खेत में सेब के 200 पौधे लगाए थे। इस बार बगीचे में ढाई क्विंटल सेब की पैदावार हुई। पेड़ों में जैविक खाद का प्रयोग होने से बाजार में सेब की खूब डिमांड है। ब्लॉक प्रमुख उर्मिला बिष्ट ने कहा कि घेस गांव की जड़ी-बूटी देश-विदेश में बिक रही है और अब सेब की पैदावार से यहां के ग्रामीणों की आर्थिकी सुधरेगी।
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