चेपड़ों, गोठिंडा, जूनीधार और टुंड्री के जंगलों में शुक्रवार को आग लग गई। चीड़ के घने जंगल होने के कारण आग बेकाबू होती जा रही है। इससे पहले थराली में 80 प्रतिशत से अधिक चीड़ के जंगल आग से चल चुके हैं। यहां केवल 20 प्रतिशत जंगल ही आग से अछूते थे, लेकिन शुक्रवार को इन क्षेत्रों में भी आग फिर भड़क गई। आग के धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। वहीं वन विभाग आग बुझाने में जुटा हुआ है। संवाद
धू-धूकर जल रहे फाटा, रेल, लोछड़ा व जखोली के जंगल
गुप्तकाशी/जखोली। केदारघाटी के फाटा, रेल और लोछड़ा के जंगल बीते कई दिनों से धू-धूकर जल रहे हैं, जिससे क्षेत्र में धुंध छाई हुई है। इधर, जखोली रेंज में भी कई जगहों पर वनाग्नि से वन संपदा को व्यापक नुकसान हुआ है।
बीते एक सप्ताह से केदारघाटी में फाटा कस्बे के ऊपरी तरफ के जंगल धू-धूकर जल रहे हैं। स्थानीय निवासी प्रमोद नौटियाल, नितिन जमलोकी, देवेंद्र सेमवाल, खुशाल रावत आदि का कहना है कि मंदाकिनी नदी के दूसरी तरफ बसे रेल गांव के ऊपरी तरफ जंगल भी आग की चपेट से स्वाह हो रहे है। इधर, जखोली ब्लॉक में भी रेंज कार्यालय के समीप का जंगल जल चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि वनाग्नि के कारण क्षेत्र में जले हुए पेड़ों के गिरने का खतरा बना है। इधर, डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए विभागीय कर्मचारियों के साथ हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। संवाद