सड़क, स्कूल समेत मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं होने से विस्थापित गांव दीदना के लोग भारी परेशानी में जी रहे हैं। वर्ष 2008 में सड़क स्वीकृत होने के बाद भी सड़क नहीं बन पाई है। ऐसे में यहां के लोग छह किलोमीटर पैदल चलकर राशन समेत जरूरी सामग्री पीठ पर ढो रहे हैं। वहीं स्कूल के बच्चे भी दीदना से छह किलोमीटर पैदल चलकर कुलिंग जा रहे हैं।
वर्ष 2018 की आपदा में कुलिंग गांव के मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। सरकार ने आपदा प्रभावित 65 परिवारों को दीदना तोक में विस्थापित किया गया था लेकिन उसके बाद विस्थापितों को क्या सुविधा चाहिए सरकार भूल गई। यहां के लोग छह किलोमीटर पैदल चलकर अखोड़ी गदेरे से कुलिंग जा रहे हैं। अखोड़ी गदेरे में बनी आरसीसी पुलिया वर्ष 2018 की आपदा में बह गई थी। यहां ग्रामीण हर बरसात में श्रमदान कर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाते हैं लेकिन सरकार की ओर से इस गदेरे पर आरसीसी पुलिया नहीं बन पाई है। वर्ष 2008 में कुलिंग-दीदना सड़क को प्रथम चरण की सैद्धांतिक व वित्तीय स्वीकृति मिली लेकिन 14 साल बाद भी सड़क नहीं बन पाई। इस सड़क की फाइल वन विभाग के पास है। दीदना में प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल नहीं है। ऐसे में स्कूल के बच्चे दीदना से पैदल चलकर कुलिंग जा रहे हैं। पूर्व प्रधान भुवन बिष्ट ने बताया कि कुलिंग का प्राथमिक विद्यालय भी जीर्णशीर्ण स्थिति में है। विद्यालय के भवन में कई दरारें पड़ी है। संवाद
आपदा प्रभावित परिवार 2020 से दीदना में रहे रहे हैं लेकिन यहां कोई भी सुविधा नहीं दी गई है। सड़क, स्कूल, पंचायत घर आदि मूलभूत सुविधाओं के लिए कई बार मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी को लिखा जा चुका है।
आठ किलोमीटर कुलिंग-दीदना सड़क को वर्ष 2008 में प्रथम चरण की स्वीकृति मिली थी। सड़क के लिए पेड़ काटे जाने हैं और इसके एवज में नए पौधे लगाने हैं। मगर पौधरोण के लिए भूमि नहीं मिल पा रही है। भूमि मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई हो पाएगी। इसके लिए राजस्व व वन विभाग से लगातार संपर्क किया जा रहा है।