बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में बोल्डरों की चपेट में आई बस के सवारियों को रेस्क्यू करने में जिले का आपदा प्रबंधन तंत्र फेल रहा। हादसा होने पर स्थानीय लोगों की ओर से ही तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। पूरा दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम बस में फंसे तीर्थयात्रियों की सही जानकारी तक नहीं दे पाई न ही सवारियों का रेस्क्यू किया गया।
बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र पिछले डेढ़ दशक से खतरों का सबब बना है। यहां एनएच की ओर से सुधारीकरण कार्य किया जा रहा है इसके बावजूद लामबगड़ की स्थिति नहीं सुधर पाई है। बरसात होते ही लामबगड़ में मलबा और बोल्डरों का गिरना भी शुरू हो जाता है। मंगलवार को सुबह आठ बजे बदरीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को लेकर जोशीमठ आ रही बस सुबह नौ बजे लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी अचानक चट्टान से छिटक कर बोल्डर बस के ऊपर आ गिरे। मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने बस से बाहर निकल रही घायल सवारियों को भूस्खलन जोन पार करवाया और उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदघाट में भर्ती कराया।
जिला प्रशासन की ओर से आपदा के दौरान त्वरित राहत, बचाव कार्य शुरू कर दिए जाने की बात कही जाती है, लेकिन आपदा घटित होने पर सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जाती हैं। लामबगड़ निवासी राकेश का कहना है कि हादसा होते ही तत्काल 108 सेवा वाहन से संपर्क किया और राहत, बचाव कार्य में जुट गए। 108 सेवा वाहन पहुंचने से पहले छह सवारियों को गोविंदघाट और जोशीमठ भेजा गया। जबकि दुर्घटना के कई घंटे बाद भी बस में फंसी सवारियों को रेस्क्यू नहीं किया जा सका।
कोट
लामबगड़ क्षेत्र में चट्टान से अभी भी रुक-रुककर पत्थर छिटक रहे हैं, जिससे राहत, बचाव कार्य में दिक्कतें आईं। जेसीबी से बोल्डरों और मलबे को हटाया गया, जिससे बस सड़क से खिसककर खाई की ओर चले गई। बस में फंसी सवारियों का जल्द रेस्क्यू कर लिया जाएगा। - यशवंत सिंह चौहान, एसपी, चमोली।