ब्लॉक सभागार में आयोजित आपदा प्रभावित गांवों की बैठक में झलिया, कुलिंग और ओडर गांवों के आपदा प्रभावितों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा गया कि पुनर्वास की मांग कई सालों से उठा रहे हैं जिसे अनसुना किया जा रहा है। स्थिति यह है कि आपदा प्रभावित फटे टेंटों और जीर्णशीर्ण मकानों में रहने को मजबूर हैं।
ब्लाक प्रमुख दर्शन दानू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में झलिया गांव के हरीश सिंह व लाल सिंह समेत कई ने कहा कि वे लाटूतोली में टेंटों रहने को मजबूर हैं। बर्फबारी से टेंट फट चुके हैं और प्रभावितों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। झलिया गांव के 12 परिवारों का पुनर्वास लाटूतोली में करने की फाइल एक साल से सरकार के पास है। कुलिंग के थान सिंह ने कहा कि गांव के 67 परिवारों का पुनर्वास दीदना में होना है, लेकिन पुनर्वास की फाइल राज्य सरकार के पास पड़ी है। अभी प्रभावित परिवार कुलिंग के जीर्णशीर्ण मकानों में रह रहे हैं। ओडर के ग्रामीणों ने पुनर्वास न होने और फल्दियागांव के महावीर बिष्ट व हीरा लाल ने प्रभावित 12 परिवारों को विस्थापन राशि न मिलने पर रोष जताया। सुरेंद्र सिंह ने पदमल्ला गदेरे से गांव को भूस्खलन से खतरा बताया। उन्होंने यहां सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग उठाई। एसडीएम केएस नेगी ने कहा कि झलिया के आपदा प्रभावितों की फाइल केंद्र सरकार में और कुलिंग के आपदा ग्रस्त परिवारों की फाइल उत्तराखंड शासन में हैं। अब शासन स्तर से ही कार्रवाई होगी। बैठक में टीएस बिष्ट, युवराज बसेड़ा, हीरा सिंह, केडी मिश्रा, पुष्कर फर्स्वाण, पान सिंह गड़िया, सोवन खत्री, पान सिंह तुलेरा, रमेश गड़िया, केशर बिष्ट, एसएस नेगी, गोपी मेहरा, पुष्कर बिष्ट, नंदन गड़िया आदि मौैजूद थे।