ऋषि गंगा में आई जल प्रलय के बाद से चीन सीमा क्षेत्र के नीती घाटी में 13 गांवों के 485 परिवार अलग-थलग पड़े हुए हैं। जब तक मलारी हाईवे पर रैणी में वैली ब्रिज का निर्माण नहीं हो जाता, ग्रामीणों के सामने जन-जीवन पटरी पर लाने की चुनौति है। खौफजदा ग्रामीण ऋषिगंगा में आए सैलाब के डर को अपने मन, मस्तिष्क से हटाने के लिए अलाव जलाकर और भजन-कीर्तन कर रात बिता रहे हैं।
लाता गांव की कमला देवी का कहना है कि ऋषि गंगा के जल प्रलय को ताउम्र नहीं भूलेंगे। यह क्षेत्र अति संवेदनशील हो गया है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। कागा गांव के प्रधान पुष्कर सिंह राणा ने बताया कि ग्रामीण मलारी हाईवे के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। पेंग और मुरंडा गांव में बिजली नहीं है। इसकी सूचना भी ऊर्जा निगम के अधिकारियों को दे दी गई है।