नंदासैंण वन आंदोलन की 33वीं वर्षगांठ पर मालई, देवलगड़सारी व बैनोली के ग्रामीणों ने नंदासैंण बाजार से वन विभाग गेस्ट हाउस तक एक किलोमीटर की पर्यावरण पद यात्रा निकाली। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता भुवन नौटियाल को पर्यावरण के क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया। लोक कलाकार जितेंद्र कुमार ने पर्यावरण संरक्षण एवं नंदासैंण आंदोलन पर शानदार लोकगीतों की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ गैरसैंण के नगर पंचायत अध्यक्ष पुष्कर रावत ने किया। उन्होंने कहा कि नंदासैंण क्षेत्र का पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। यहां के लोगों ने बांज के जंगल को बचाने के लिए जो प्रयास किया वो पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। इस दौरान पर्यावरण गोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें पेड़ पौधों से होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही मालई, देवलगड़सारी और बैनाली गांव की महिलाओं को वन विभाग की ओर से पौधे वितरित किए गए। इस मौके पर पूर्व दर्जाधारी सुरेश बिष्ट, जिपंस धनपा देवी, क्षेपंस हरेंद्र चौधरी, कमल कोहली, द्वारिका प्रसाद, सुनील तिवारी, सरिता कुंवर, लक्ष्मण रावत, शकुंतला देवी, प्रकाश भंडारी, मोहन सिंह, संजय कुमार, अवतार भंडारी, राजेंद्र रावत, विनोद रावत, मंगला कोठियाल, डॉ. डीके थपलियाल, वीपी भट्ट, एमएस निराला, त्रिलोक सिंह और गोपाल रमोला आदि मौजूद थे।
बांज के जंगल में नहीं रोपने दिए थे चीड़ के पौधे
कर्णप्रयाग। नंदौसैंण क्षेत्र में सैकड़ों हेक्टेयर में बांज, बुरांश, फनियाट का जंगल फैला है। क्षेपंस हरेंद्र चौधरी व भुवन नौटियाल ने कहा कि वर्ष 1988 में वन विभाग यहां के बांज के पेड़ों के बीच जबरन चीड़ के पौधे रोपना चाह रहा था, लेकिन बैनोली, देवलगड़सारी, मालई, कफलोड़ी, मलेठी, एरोली आदि गांवों की महिलाओं और पुरुषों ने उनको चीड़ के पेड़ नहीं रोपने दिए और वन विभाग को वहां से खाली हाथ जाना पड़ा था। उस दौरान ग्रामीणों के पक्ष में पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट भी आगे आए। वर्ष 1988 से हर साल नंदासैंण में वन आंदोलन के मौके पर रैली निकाली जाती है।