पहले आपदा से घर गांव तबाह हुआ। नया ठिकाना बनाया तो वहां भी सड़क का मलबा घर को ले डूबा। छह माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी मुआवजे के नाम पर आश्वासन देकर प्रभावित को छला जा रहा है। अब प्रभावित ने बीच सड़क पर ही टेंट लगाने का फैसला किया है और अपना अंतिम पत्र लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन को दे दिया है।
पोखड़ा गांव के बचन सिंह गाड़ी चलाकर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। 2013 की आपदा में त्यूला गांव पूरी तरह से भूस्खलन की चपेट में आ गया था। शासन-प्रशासन ने गांव वालों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने के लिए कहा था और विस्थापन का झूठा आश्वासन देकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। इन्हीं प्रभावितों में बचन सिंह भी थे। बचन सिंह ने भी अन्य प्रभावितों की तरह ही त्यूला गांव के पोखड़ा तोक में कर्ज लेकर मकान बनाया, लेकिन 19 नवंबर 2021 को कुलसारी रेई-नामतोल सड़क का मलबा बचन सिंह के नए आशियाने को भी लील गया। किसी तरह बचन सिंह के परिवार ने अपनी जान बचाई और जंगल में भागे। बचन सिंह ने इस संबंध में शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग को प्रभावित को मुआवजा देने को कहा, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला। प्रभावित बचन सिंह का कहना है कि विभाग हर बार आश्वासन दे रहा है कि आपकी क्षति का मूल्यांकन कर सात लाख 78 हजार रुपये का प्रस्ताव मुख्य अभियंता पौड़ी को भेजा गया है, लेकिन प्रभावित को कब मिल पाएगा, इसका सही जबाव कोई नहीं दे रहा है। अब फिर से मानसून सीजन आ गया है। अब बचन सिंह ने कहा है कि प्रशासन से जो टेंट मिला है, उसे वह सड़क के बीचों-बीच लगाएंगे।
बचन सिंह के मकान की क्षति का आकलन कर मुआवजे के लिए प्रस्ताव प्रमुख अभियंता कार्यालय देहरादून भेजा गया है। अभी मुआवजा मद में धनराशि नहीं आई है। मैं स्वयं तीन बार प्रमुख अभियंता कार्यालय जा चुका हूं। जैसे ही इस मद में धनराशि आएगी, प्रभावित को मुआवजा मिल जाएगा।
-अजय काला अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग थराली।