गोपेश्वर। राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान गोपेश्वर में जहां शिक्षकों की कमी बनी है वहीं भावी इंजीनियरों को बिना उपकरणों के पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि यहां संस्थान किराए के जीर्णशीर्ण भवन पर चल रहा है। थोड़ी सी बारिश होने पर कक्षा-कक्षों में पानी टपकने लगता है।
गोपेश्वर पॉलीटेक्निक संस्थान की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। शुरुआत के दो वर्ष संस्थान गौचर में चला, बाद में जिला प्रशासन ने संस्थान संचालित करने के लिए गोपेश्वर स्थित ऑफीसर कालोनी के भवन दे दिए। यहां वर्तमान में आईटी, सिवील और मैकेनिकल ट्रेड चल रहे हैं। तीनों ट्रेडों में निर्धारित 120 सीटों में से 77 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन यहां शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। संस्थान एक स्थायी और चार संविदा शिक्षकों के भरोसे चल रहा है, जबकि एक ट्रेड में चार शिक्षक और एक एचओडी का पद सृजित है। संपूर्ण संस्थान में एक संविदा कार्यशाला अनुदेशक तैनात है, जबकि यहां पांच अनुदेशकों के पद सृजित हैं। यहां बिजली व्यवस्था भी बदहाल है। अधिकतर समय यहां बिजली गुल रहती है, जिससे आईटी ट्रेड के छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन कार्य प्रभावित होता है।
संस्थान में शिक्षकों की कमी है। इसके लिए लगातार पॉलीटेक्निक निदेशालय से संपर्क किया जा रहा है। संस्थान का अपना भवन निर्माणाधीन है। सीमित संसाधनों और शिक्षकों में ही संस्थान चल रहा है। - ओमेंद्र प्रसाद, प्रधानाचार्य, पॉलीटेक्निक संस्थान, गोपेश्वर।
पॉलीटेक्निक पोखरी एक शिक्षक के भरोसे
पोखरी (चमोली)। पॉलीटेक्निक संस्थान पोखरी में शिक्षक और भवन का अभाव बना हुआ है। यहां सिविल, इलेक्ट्रॉनिकल और मैकेनिकल ट्रेड चल रहे हैं, जिनमें निर्धारित 75 सीटों में से 72 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। संस्थान में पठन-पाठन एक संविदा शिक्षक के भरोसे चल रहा है। अभिभावक गबनीगांव निवासी बलवीर सिंह नेगी ने बताया कि उनकी बेटी सिविल ट्रेड में अध्ययनरत है, लेकिन शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई बाधित हो रही है। कालेज किराए के भवन पर चल रहा है। प्रधानाचार्य नरेश सिंह ने बताया कि शिक्षकों के अभाव में दिक्कतें तो आ रही हैं। शीघ्र ही हमें निदेशालय से पांच शिक्षक मिल जाएंगे। इसके बाद पठन-पाठन में दिक्कतें नहीं आएंगी।