कर्णप्रयाग। ब्लाक के चमाली, स्वर्का, धल, कांचुला, डोंठला गांव तक सड़क के लिए ढाई दशक में चार बार सर्वे हो चुका है, लेकिन सड़क नहीं बन पाई। ऐसे में आज भी ग्रामीणों को मीलों पैदल दूरी नापनी पड़ रही है।
ग्राम पंचायत स्वर्का के शंभू प्रसाद मैखुरी कहते हैं कि 1989 में गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए तत्कालीन विधायक और लोनिवि के अधिकारियों को पत्र दिया गया। ग्रामीण गंगाधर, टीका प्रसाद के अनुसार लगातार मांग के बाद वर्ष 2000 में विभाग ने लंगासू से मार्ग का सर्वे किया। फिर वर्ष 2010-11 में खेत-निवाड़ी-सिंलगी मोटर मार्ग से लिंक मार्ग का सर्वे किया गया, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2013 में नई सड़क लंगासू-चमाली-स्वर्का की स्वीकृति मिली लेकिन स्वीकृति के 18 माह में दो बार सर्वे की कार्रवाई ही हो सकी है। प्रधान किरन देवी और महिला मंगल दल अध्यक्ष प्रेमा देवी का कहना है कि सड़क के अभाव में गांवों में पलायन बढ़ रहा है, यदि स्वीकृत सड़क पर जल्द कार्रवाई नहीं की जाती तो लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
सड़क का सर्वे पूरा कर भूगर्भीय निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके बाद फारेस्ट क्लीयरेंस की कार्रवाई की जाएगी। पहले लिंक मार्ग का सर्वे किया गया था, लेकिन अब नई सड़क की स्वीकृति मिलने के बाद कार्रवाई की जा रही है। - मनोज भट्ट, अधिशासी अभियंता, लोनिवि गौचर।