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होली पर जमकर हुई रंगों की बौछार

Wed, 19 Mar 2014 05:31 AM IST
Chamoli
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गढ़वाल। पिछले वर्ष आई आपदा का प्रभाव होली में साफ दिखाई दिया। केदारघाटी के अधिकांश गांवों में होली नहीं मनाई गई। आपदा में कहीं लोगों ने अपने परिजनों को खोया, तो कई परिवार बेघर हो गए। गढ़वाल केअन्य हिस्सों में रंगों का त्योहार उल्लास के साथ मनाया गया। लैंसडौन में 30 साल बाद सामूहिक होली खेली गई।
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कोटद्वार। होली के हुड़दंग में छुटपुट मारपीट की घटनाओं को छोड़कर रंगों का पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लोग सुबह से ही एक दूसरे पर रंगों की बौछार करने के लिए घरों से निकल पडे़। बच्चे, बडे़ सभी टोली बनाकर घर-घर, गांव-गांव घूमे। लैंसडौन में सैकड़ों लोगों ने 30 साल बाद सामूहिक होली खेली। गांधी चौक पर लोगों ने ढोल-नगाड़ों की धुन पर लोग जमकर थिरके और एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया।
कोटद्वार में भी लोग एक दूसरे के यहां रंगों का उत्सव मनाने पहुंचे। मुसलिम समुदाय के लोगों ने हिंदुओं के गले मिलकर होली के पर्व में साथ निभाया। भाबर के निंबूचौड़, दुर्गापुरी, मोटाढाक , हल्दूखाता, कलालघाटी, कण्वाश्रम, किशनपुरी, झंडीचौड़ और सिगड्डी क्षेत्र में भी होली की धूम रही। सतपुली कसबे में हरिनाम संकीर्तन मंडली और राधाकृष्ण कीर्तन मंडली ने शोभायात्राएं एवं भव्य झांकियां निकाली गयीं। लैंसडौन में 30 साल के इतिहास में पहली बार लोगों ने सामूहिक रूप से होली खेली। होली के पर्व पर शराब के बढ़ते प्रचलन और लड़ाई झगडे़ के डर से लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया था। इस बार के आयोजन से शराब और शराबी दूर रहे।
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होली के हुड़दंग में 36 पहुंचे अस्पताल
कोटद्वार। होली के हुड़दंग के बीच शराब पीकर वाहन चलाने और आपस में मारपीट के चलते 36 लोगों को घायल अवस्था में यहां सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कोटद्वार के शिवपुर, सनेह और भाबर के कई इलाकों में छुटपुट मारपीट की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। पुलिस का कहना है कि मारपीट और झगड़े के कई मामले प्रकाश में आए हैं। स्टेडियम कालोनी निवासी पारुल के साथ नशेड़ियों ने जमकर मारपीट कर दी, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।


सिमली में मजूदरों से उलझे होल्यार
कर्णप्रयाग। छुटपुट घटनाओं को छोड़कर रंगों का त्योहार शांतिपूर्वक मनाया गया। कर्णप्रयाग के सुभाषनगर में महिलाओं ने उमा देवी मंदिर परिसर में होली मिलन आयोजित किया तो गैरसैंण ब्लाक के ऐरोली गांव में स्थित जलेश्वर महादेव में भी होली मिलन का आयोजन किया गया। डिम्मर के टटेश्वर महादेव में लोगों ने उपवास रखकर होली मनाई। दोपहर दो बजे लोगों ने भोले शंकर को भोग चढ़ाया। सिमली में कुछ होल्यारों और ग्रेफ के मजदूरों के बीच मारपीट होने से दो मजदूर और एक युवक घायल हो गया। घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया है। नारायणबगड़, थराली, देवाल, गैरसैंण और आदिबदरी में भी लोगों ने उत्साह से होली मनाई।


चमोली में हर्षोल्लास से मनाई होली
गोपेश्वर। गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में होल्यारों की टोलियों ने परंपरागत वाद्य यंत्रों की थाप पर होली के गीत गाए। जोशीमठ नृसिंह मंदिर और कृष्ण मंदिर प्रांगण में भक्तों ने जमकर अबीर-गुलाल के साथ होली खेली। जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन ने कुंड कालोनी में अधिकारियों के संग होली खेली। पीपलकोटी, घाट, नंदप्रयाग, पोखरी आदि स्थानों पर भी होली हर्षोल्लास के साथ खेली गई।
उत्तरकाशी। जिलेभर में होली का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। होल्यारों ने एक-दूसरे पर रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। नगर पालिका सभागार में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
लोकगायक ओम बधानी की कविता ‘मुखड़ी मा उलार गल्वाड़ी मा रंग, ऐगे-ऐगे होली कू त्योहार’ तथा डा. यशोदा प्रसाद सेमल्टी की ‘जातपात छोड़ो सच्चाई सत्य की चादर ओड़ो’ ने खूब तालियां बटोरी। कवि सुधीर तिवारी, केशव पुरी, विजय पंवार, बीपी बलूनी, डा. महेंद्र परमार आदि कवियों की प्रस्तुतियां भी खूब सराही गई। इस मौके पर पूर्व ब्लाक प्रमुख हरि सिंह राणा, जीतवर राणा, वेद प्रकाश, मुकेश तलवाड़, डा. रामचंद्र उनियाल आदि मौजूद रहे।


केदारघाटी के कई गांवों में होली नहीं मनी
ऊखीमठ/गुुप्तकाशी। पिछले वर्ष आई आपदा का प्रभाव होली में साफ दिखाई दिया। केदारघाटी के कुछ गांवों को छोड़कर अन्य इलाकों में होली नहीं मनाई गई। आपदा में कहीं लोगों ने अपने परिजनों को खोया, तो कई परिवार बेघर हो गए। ऐसे में होली का त्योहार पर लोग पुराने दिन याद कर घरों में ही बैठे रहे। गांवों में होली मनाने के लिए बच्चों की टोली भी नहीं निकली। गत वर्ष आई आपदा दीवली, भणिग्राम, लमगौंडी, बणसू, ल्वारा, ल्वाणी, बड़ासू, जाल, चिलाैंड, चौमासी, किमाणा, पेंज, पठाली, डंगवाड़ी, सारी, करोखी, उषाड़ा और हुड्डू समेत अन्य गांवों में होली के दिन सन्नाटा रहा। इन गांवाें के लोग आपदा में मारे गए। सबसे अधिक गमगीन स्थिति उन घरों में थी, जहां के छोटे-छोटे बच्चे जलप्रलय में लापता हो गए।

शराब पीने से रोका तो नदी में लगाई छलांग
गोपेश्वर। थराली निवासी वीरेंद्र राम ने अपने बडे़ पुत्र रोशन लाल (23) को 16 मार्च की रात 9 बजे होली के दिन शराब न पीने की हिदायत दी थी। पिता की इस बात पर रोशन लाल तमतमा गया। इसके बाद वह घर से निकला और थोड़ी दूर स्थित पिंडर नदी में कूद गया। वीरेंद्र राम के चिल्लाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। थानाध्यक्ष देवराज शर्मा ने बताया कि एक घंटे की मशक्कत के बाद युवक को नदी से निकालकर परिजनों के हवाले कर दिया गया है।
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