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पुल के अभाव में जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे उर्गम घाटी के ग्रामीण

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जोशीमठ। आपदा में बहा उर्गम घाटी का पुल छह साल बीत जाने के बाद भी नहीं बना। घाटी के पिलखी, भेंटा और अरोसी गांव के ग्रामीणों की आवाजाही के लिए कल्पगंगा पर खवाला नामक स्थान पर लोहे का पुल निर्मित था, लेकिन आपदा के दौरान यह पुल कल्पगंगा के तेज बहाव में बह गया था।
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लोनिवि प्रांतीय खंड गोपेश्वर ने वर्ष 2014 में सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत कल्प गंगा पर दो करोड़ की लागत से लोहे का पुल निर्माण कार्य शुरू तो किया, लेकिन आज तक पुल आवाजाही के लायक नहीं बन पाया है। स्थिति यह है कि ग्रामीण कल्प गंगा में जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यहां एक कच्चे पुल का निर्माण तो किया है, लेकिन इन दिनों कल्प गंगा में जल स्तर बढ़ने से पुल से गुजरने में भी खतरा बना हुआ है। ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी, बलवीर सिंह नेगी, का कहना है कि कई बार लोक निर्माण विभाग और जिलाधिकारी से पुल निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग उठाई गई, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस संबंध में मुख्य सचिव को भी ज्ञापन भेजा है।
सीमा क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है। केंद्र से पुल निर्माण के लिए 70 फीसदी धनराशि भी अवमुक्त हो गई है। जिला योजना से 45 लाख की धनराशि की मांग की गई है। धनराशि का आवंटन होते ही पुल निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
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डीएस नेगी, ईई, लोनिवि, प्रांतीय खंड गोपेश्वर।
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