गोपेश्वर। प्रतिमाह पांच हजार रुपये मानदेय देने समेत कई मांगों के लिए अंशकालिक दाई संगठन से जुड़ी दाइयों ने कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगों का ज्ञापन भेजा।
दाइयों ने कहा कि लंबे समय से वे मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। दाइयां कई सालों से निरंतर अपनी सेवाएं देते आ रही हैं। सरकार की ओर से चलाए जाने वाले पल्स पोलियो और टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का बखूबी निर्वहन करती आ रही हैं, लेकिन महंगाई के इस दौर में भी प्रतिमाह मात्र चार सौ रुपये मानदेय दिया जा रहा है। धरना देने वालों में संगठन अध्यक्ष दुर्गा देवी, मुन्नी देवी, कमला देवी, विमला, कमला, गीता, कल्पेश्वरी देवी, सरिता देवी, बैशाखी देवी, इंद्रकला, जानकी, कल्पेश्वरी, राधा, बसंती, शकुंतला और सीटू के जिलाध्यक्ष मदन मिश्रा शामिल रहे।
नई टिहरी में किसान सभा के जिला सचिव भगवान सिंह राणा के नेतृत्व में अंशकालिक दाइयों ने कलक्ट्रेट में धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि 2007 से दाइयां केवल चार सौ प्रतिमाह मानदेय पर ग्रामीण क्षेत्र में सुरक्षित प्रसव करवा रही हैं, लेकिन सरकारों ने 12 साल में एक भी रुपये नहीं बढ़ाया है। उन्होंने मांगों का ज्ञापन सीएम को भेजा। इस मौके पर सरोजनी गुसाईं, कांता चमोली, शांति सजवाण, गीता नेगी, मक्खी देवी, राजू देवी, चंदा देवी और राधा देवी आदि मौजूद थी।
पौड़ी में जिला मुख्यालय में हुई उत्तराखंड दाई संगठन की बैठक में मांगों का समाधान जल्द नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई। संगठन की जिलाध्यक्ष अनीता कंडारी ने कहा कि प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विषम परिस्थितियों के बावजूद दाइयां अपने दायित्व का निर्वहन सेवाभाव से करती आ रही हैं, लेकिन सरकार दाइयों के हितों की लगातार उपेक्षा कर रही है। बैठक में उर्मिला देवी, बिमला देवी, समा देवी, राजी देवी, मुन्नी देवी, रमा देवी, सुनीता देवी, वीना देवी व मीना आदि मौजूद थे।
ये हैं दाई संगठन की मांगें
- प्रतिमाह 5000 रुपये मानदेय दें और मानदेय का भुगतान प्रतिमाह किया जाए।
- दाईयों को ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा से जोड़ा जाए
- 60 साल से ऊपर आयुवर्ग की दाईयों को प्रतिमाह 1000 रुपये पेंशन सुविधा।
- आंगनबाड़ी व भोजन माताओं की तर्ज पर त्योहार बोनस।
- दाईयों की सेवानिवृत्ति व मृत्यु होने पर रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए।
- अंटाइड फंड से मिलने वाले भत्ते का विस्तार किया जाए।