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बदरीनाथ में कपाट बंद होने के साक्षी बने 10 हजार श्रद्धालु

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भगवान बदरीनाथ के जयघोष और धार्मिक परंपराओं के साथ रविवार को शाम 5 बजकर 13 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे करीब 10 हजार श्रद्धालु इस शुभ घड़ी के गवाह बने। सोमवार को बदरीश पंचायत (बदरीनाथ गर्भगृह) से उद्धव जी और कुबेर जी की उत्सव मूर्ति योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेगी।
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रविवार को तड़के तीन बजे बदरीनाथ मंदिर के कपाट खोले गए। सुबह साढ़े तीन बजे से भगवान बदरीनाथ की अभिषेक और महाभिषेक पूजाएं शुरू हुई। गुप्त मंत्रोच्चारण के साथ भगवान बदरीनाथ का आह्वान किया गया। धाम में धार्मिक प्रक्रियाएं दोपहर तक चली। दो बजे धार्मिक परंपराओं के अनुसार, रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा और माणा गांव की कन्याओं की ओर से निर्मित कंबल पर घी का लेपन कर बदरीनाथ को ओढ़ाया गया। इसके बाद बदरीनाथ गर्भगृह से भगवान कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की उत्सव मूर्ति को गर्भगृह से बाहर लाया गया। सोमवार को आदिगुरु शंकराचार्य, कुबेर जी, गरुड़ जी व उद्धव जी की उत्सव डोलियां योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी।
कपाट बंद होने के दौरान जय बदरीनाथ के जयघोष और गढ़वाल स्काउट की बैंड धुन से बदरीनाथ धाम गुंजायमान हो उठा। कई तीर्थयात्रियों की ओर से विजयलक्ष्मी चौक, टैक्सी स्टैंड और पुलिस थाने के सम्मुख भंडारे आयोजित किए गए। बीकेटीसी अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल, मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह सहित समिति के सदस्यों व पदाधिकारियों ने हनुमान मंदिर और घंटाकर्ण जी की पूजा-अर्चना भी संपन्न की। इस मौके पर बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी, केदारनाथ विधायक मनोज रावत, बीकेटीसी सदस्य ऋषि प्रसाद सती, अरुण मैठाणी, राजपाल जड़धारी, चंद्रकला ध्यानी, धीरज पंचभैया, अनिल कंसल, राजपाल सिंह पुंडीर, तेजवीर कंडेरी, मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़, उपमुख्य अधिकारी सुनील तिवारी, राजेंद्र चौहान, मोहन सती, भाष्कर डिमरी, पंकज डिमरी आदि मौजूद थे।
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बदरीनाथ में कब क्या हुआ---
प्रात: 03.00 बजे-बदरीनाथ मंदिर का सिंहद्वार खुला।
प्रात: 03.15 बजे-मंदिर कर्मचारी सभा मंडप में पहुंचे।
प्रात: 03.30 बजे-बदरीनाथ भगवान की अभिषेक व महाभिषेक पूजाएं शुरू।
सुबह 10.00 बजे-बदरीनाथ भगवान को राज भोग लगाया गया।
अपराह्न 03.50 बजे-बदरीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू
शाम 4.00 बजे -रावल ने स्त्री वेश धारण किया और माता लक्ष्मी की मूर्ति को बदरीनाथ गर्भगृह में प्रतिष्ठापित किया।
शाम 5.13 बजे - बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए।
बदरीनाथ धाम में सात घंटे तक चली बर्फीली हवाएं
बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में शनिवार रात करीब एक बजे बर्फीली हवाएं चलनी शुरू हुई, जो रविवार को सुबह आठ बजे थमी। इस दौरान तीर्थयात्रियों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा। बदरीनाथ धाम में अधिकांश होटल और लॉज बंद हो गए हैं, जिससे धाम में पहुंचे तीर्थयात्रियों को रहने और खाने के लिए भटकना पड़ा। कई तीर्थयात्री ठहरने की जगह न मिलने के कारण पांडुकेश्वर लौटे। रविवार को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद कई तीर्थयात्री रात्रि प्रवास के लिए यात्रा पड़ावों में पहुंचे। जबकि कई तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम में ही रुके हुए हैं। लखनऊ से पहुंचे तीर्थयात्री अभिषेक, रागनी और कनुप्रिया का कहना है कि बदरीनाथ धाम के दर्शन कर रात्रि प्रवास के लिए वे जोशीमठ लौटे।
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