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गोमुख से गंगासागर तक... खंगाला जाएगा पूरा गंगा बेसिन

Wed, 18 May 2016 03:43 AM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • - पहली बार बेसिन के इको सिस्टम का खाका होगा तैयार
  • - डाटा बेस तैयार करने को केंद्र सरकार ने दी हरी झंडी 
  • - वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) को मिली जिम्मेदारी
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गंगा - फोटो : demo pic
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विस्तार
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मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत गोमुख से गंगा सागर तक समूचा गंगा बेसिन पहली बार एक साथ खंगाला जाएगा। गंगा बेसिन के वनीकरण के पहले विज्ञानी ढाई सौ किमी लंबे बेसिन का डाटा बेस तैयार करेंगे। फिर गंगा बेसिन के पांच राज्यों में वनीकरण का सिलसिला शुरू होगा।
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केंद्र सरकार ने गंगा बेसिन का डाटा बेस तैयार करने के लिए वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) को जिम्मेदारी दे दी है। केंद्र सरकार डाटा बेस इसलिए तैयार करवा रही है, ताकि नमामि गंगे परियोजना में कोई घपला न होने पाए।

गंगा बेसिन में अभी तक देश के कई प्रमुख संस्थानों ने अलग-अलग टुकड़ों में शोध कार्य किए हैं। किसी ने पूरे बेसिन पर एक साथ कार्य नहीं किया है। टुकड़ों में हुए इन शोधों का डाटा बेस मिलान नहीं खा रहा है। शोधों की रिपोर्ट अलग-अलग तथ्यों को उजागर कर रही है।
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समूचे गंगा बेसिन का डाटा जुटा रहा केंद्र

गंगा - फोटो : amar ujala
इस पर केंद्र समूचे बेसिन का एक साथ शोध करा रहा है ताकि गंगा बेसिन की मौजूदा स्थिति के डाटा उपलब्ध हो जाएं। जब नमामि गंगे का पहला चरण समाप्त होगा तो इस डाटा बेस से तुलना की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि परियोजना से गंगा बेसिन में कितना सुधार हुआ है।

गंगा बेसिन में वनीकरण के 2300 सौ करोड़ के प्रस्ताव को केंद्र की स्टेयरिंग कमेटी ने पास कर दिया है। साथ ही बेसिन के शोध प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई है।

सभी पांच राज्यों ने अपना वार्षिक एक्शन प्लान भी तैयार कर लिया है। शोध प्रस्ताव के तहत गंगा में पहाड़ों के कटान से जमा हो रहे सेडीमेंटेशन की स्थिति पता की जाएगी।
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गंगा बेसिन का इको सिस्टम डाटा होगा तैयार

गंगा - फोटो : अमर उजाला
मौजूदा समय में उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के गंगा बेसिन का इको सिस्टम का डाटा तैयार होगा। इसमें जीव-जंतुओं, वनस्पतियों के प्रकार, मृदा के प्रकार, पानी की क्वालिटी भी पता की जाएगी।

इनका है कहना
पहली बार पूरे गंगा बेसिन का डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। अभी तक बेसिन के समूचे ‘स्ट्रेच’ पर किसी ने काम नहीं किया। टुकड़ों में काम हुए थे। इस आधार पर बेसिन में सुधार की स्थिति भी पता लगती रहेगी।
-डॉ. ओमवीर सिंह, वरिष्ठ विज्ञानी, एफआरआई
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