अर्द्घकुंभ मेला योजना में सफाई व्यवस्था पर लगभग 17 करोड़ का भारी भरकम बजट था। इसके बावजूद धर्मनगरी को धूल-धक्कड़ और पॉलिथीन से मुक्ति नहीं मिल पाई है। अर्द्घकुंभ में श्रद्घालु की भारी कमी भी लाभकर साबित हुई है।
सफाई के निजी ठेकेदारों को मैनपावर तथा अन्य संसाधन भी कम लगाने पड़े हैं। सफाई के मामले में अर्द्घकुंभ को मॉडल बनाने का दावा भी धरा रह गया है। मेलाधिष्ठान ने अर्द्घकुंभ मेला सेक्टरों की सफाई व्यवस्था अपने हाथ में रखी, जिसके लिए लगभग 11 करोड़ रुपये रखे गए।
5 करोड़ 44 लाख निगम को दिए गए अलग
शहरी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था के लिए संसाधन जुटाने के लिए नगर निगम को 5 करोड़ 44 लाख रुपये अलग से दिए गए हैं। दावा किया गया था कि धर्मनगरी को धूल तथा पर्यावरण के लिए हानिकारक पॉलिथीन से मुक्त किया जाएगा। लेकिन इस दिशा में कुछ भी किया नहीं गया है। चार महीने में एक दिन भी शहर में जमा पॉलिथीन की सफाई के लिए अभियान नहीं चलाया गया।
शहर के नदी-नाले व नालियां, पार्क, चौराहे पॉलिथीन और हानिकारक थर्माकोल के डिस्पोजलों से भरे हुए हैं। शहर के पुल, सड़क के डिवाइडरों के किनारे मिट्टी भरी पड़ी है, जो लोगों को परेशान किए हुए हैं, परंतु नागरिकों की बार-बार की शिकायत के बाद भी किसी ने सफाई नहीं कराई है।
मेला सेक्टरों की तो जरूरत ही नहीं पड़ी है और उनमें निजी ठेकेदारों को सफाई का 7 करोड़ 91 लाख रुपये से का ठेका दिया गया। श्रद्घालुओं के नहीं आने से निजी ठेकेदारों की अच्छी कमाई हो गई है।
पॉलिथीन के विरूद्घ नहीं चलाया अभियान
नगर निगम को 5 करोड़ 44 लाख रुपये मिले थे। मेयर और एमएनए दावा किया था कि शहर में पॉलिथीन कचरे के विरूद्घ अभियान चलाकर सफाई करा दी जाएगी। एनजीटी के पॉलिथीन पर प्रतिबंध के आदेश को लागू किया जाएगा। लेकिन चार महीने के अंदर शहर की छाती पर जमा पॉलिथीन कचरे के विरूद्घ एक दिन का भी अभियान नहीं चलाया गया। मेयर मनोज गर्ग ने भी माना कि अभियान नहीं चलाया गया है जबकि इसके लिए कई बार अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
मेला सेक्टरों में नहीं है पॉलिथीन
अर्द्घकुंभ मेला के किसी भी मेला सेक्टर में पॉलिथीन कचरा पड़ा हुआ नहीं है। सेक्टरों में जमा झाड़ियों व पॉलिथीन की पहले सफाई करा दी गई थी। सेक्टरों में भीड़-भाड़ नहीं थी इसलिए पॉलिथीन का उपयोग भी नहीं हुआ है। मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत नहीं आई।
डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर मेलाधिकारी।