जंगली जानवर के लिए जैव ध्वनिक मशीन
खेती को सुअर और बंदरों से हो रहे नुकसान के चलते उत्तराखंड में पहाड़ के किसान खेती किसानी छोड़ने लगे हैं। किसानों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के विशेषज्ञों ने बायो एक्वास्टिक यंत्र बनाया है। बैटरी से संचालित यह यंत्र सुअरों को डराने के लिए तेंदुए, बाघ और कुत्ते आदि जानवरों की रिकॉर्डेड आवाज निकालता है।
जंगली जानवरों से खेती को हो रहे नुकसान से आईसीएआर के विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। संस्थान ने गुवाहाटी (असोम), जोधपुर (राजस्थान), हवालबाग (अल्मोड़ा) में सुअर अनुसंधान संस्थान स्थापित किया है। आईसीएआर के विशेषज्ञों ने खेतों में पहुंच कर फसल को चौपट कर रहे सुअरों को भगाने के लिए बायो एक्वास्टिक यंत्र बनाया है।
सौर ऊर्जा पैनल से चार्ज होने वाली बैटरी से चलने वाला यह यंत्र एक तरह से लाउड स्पीकर की तरह है जो तेंदुए, बाघ और कुत्ते आदि जानवरों की आवाज निकालता है। जरूरत के मुताबिक इस यंत्र में समय भी निर्धारित किया जा सकता है। वीपीकेएएस के निदेशक डॉ. ए पटनायक ने बताया कि रिकॉर्डेड आवाज सुनाई देने से सुअर उस स्थान से भाग जाते हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल में इस यंत्र का परीक्षण कारगर रहा है।
अल्मोड़ा में भी इसका परीक्षण किया जा रहा है। यहां के लिए कारगर पाए जाने पर यंत्र का व्यावसायिक उत्पादन कर किसानों तक पहुंचाने की योजना है। फिलहाल, इसमें 25 हजार का खर्च आ रहा है। बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से लागत में काफी कमी आएगी। सरकार से अनुदान मिलने पर कीमत कम होने से आम किसानों तक यह यंत्र पहुंच सकेगा। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान पाया गया कि यंत्र से निकलने वाली आवाज 2.5 एकड़ क्षेत्र में मौजूद सुअरों को खदेड़ सकता है।