फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बातें तो बहुत हुई लेकिन, न गरीबी कम हुई और न बेरोजगारी

विज्ञापन
सुनील कुमार - फोटो : BAGESHWAR
विज्ञापन
बागेश्वर। वर्तमान हालातों में देेश की सामाजिक न्याय प्रणाली पूरी तरह से चरमराई नजर आती है। सामाजिक विषमताएं बढ़ रही हैं। बेरोजगारी और गरीबी को हटाने के लिए ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं। अमीर और गरीब के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। एक वर्ग पीढ़ी दर पीढ़ी गरीबी में जीवन यापन करने को मजबूर है, जबकि एक वर्ग की अमीरी लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन

देश और प्रदेश के नेता गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के वादों को लेकर चुनाव मैदान में उतरती हैं और चुनाव जीतने के बाद गठित सरकार इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेती है। जिसका परिणाम है कि युवा वर्ग शिक्षित और योग्य होते हुए भी रोजगार की तलाश में धक्के खा रहा है। कई युवा योग्य और प्रतिभाशाली होते हुए भी गरीबी के कारण बेहतर शिक्षा और कैरियर से वंचित रह जाते हैं। विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर शिक्षित बेरोजगार युवाओं ने सामाजिक न्याय प्रणाली को बेहतर करने के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और गरीबी उन्मूलन के लिए मजबूत इच्छाशक्ति को जरूरी बताया।
देश से गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने के लिए ठोस पहल किए जाने की जरूरत है। शिक्षा के ढांचे में बदलाव, आर्थिक रूप से कमजोर को विशेष मदद आदि योजनाओं के संचालन की जरूरत है। हर गरीब के उत्थान के लिए समान रूप से योजनाओं का निर्माण और संचालन किया जाना चाहिए।
विज्ञापन

दीपक तड़ागी
बेरोजगारी जिस रफ्तार से बढ़ रही है, वह आने वाले समय के लिए खतरे का संकेत है। सरकारों को रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। स्कूलों में रोजगार और स्वरोजगार से संबंधित शिक्षा मिलेगी तो युवा अपनी रुचि के अनुसार शिक्षा हासिल कर पाएगा। जिसका लाभ उसे कैरियर निर्माण में मिलेगा।
विज्ञापन

सुनील कुमार,
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें