किस्सागोई के लिए डुंगरा भनोली गांव की गांगुली बिष्ट।
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बागेश्वर। ग्राम डुंगरा भनोली निवासी गांगुली बिष्ट (85) ने बताया कि समय बदलने के साथ ही आज पंचायत चुनावों का स्वरूप भी काफी बदल गया है। पहले चुनाव लड़ने के लोग बहुत कम इच्छुक होते थे। गांव में आमसभा होती थी और सर्वसहमति से गांव के बेदाग छवि, ईमानदार व कर्मठ व्यक्ति को प्रधान चुन लिया जाता था। उन दिनों प्रधान का बड़ा सम्मान होता था। प्रधान भी तब जनता और गांव के विकास के लिए काम करता था। अब वह बात नहीं रह गई है।
पहले विकास के नाम पर वोट मांगा जाता था। जो प्रत्याशी मतदाताओं को शराब, मटन, चिकन आदि परोसता या अन्य कोई लालच देता तो गांव के लोग उसे वोट ही नहीं देते थे। इस डर से प्रत्याशी इन चीजों से दूर ही रहते थे। महिलाएं परिवार के मुखिया की रायशुमारी के बाद ही वोट देती थीं। सुबह तड़के ही वोट देने निकलना पड़ता था। इसके बाद खेतों में काम करने जाना पड़ता था। आज महिलाएं शिक्षित हो गई हैं। पहले बेदाग छवि वाला व्यक्ति कई सालों तक प्रधान चुना जाता था। अब वो बात नहीं रह गई है। आज पंचायतों में गुटबाजी, क्षेत्रवाद, जातिवाद, धनबल हावी हो गया है। ऐसे में जो व्यक्ति प्रधान चुनकर आता है उसमें जनता की सेवा का भाव नहीं रह जाता है।