बागेश्वर के बिलौना में गेहूं के खेत से जानवरों के लिए चारा काटतीं महिलाएं। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के दौरान खेती, किसानी का काम भी सीमित हो गया है। अपने पहाड़ में खेती का अधिकांश बोझ मातृशक्ति पर है। महिलाएं लॉकडाउन में छूट की अवधि में खेतों में काम कर रही हैं। जानवरों के लिए चारा काट रही हैं। खास बात यह है कि महिलाएं खेती, किसानी के समय सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रख रही हैं।
बुधवार को बागेश्वर के बिलौना गांव में ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला। बिलौना गांव में एक खेत में चार महिलाएं गेहूं के खेत से घास निकाल रही थीं। महिलाएं एक दूसरे से फासला भी बनाए हुए थीं, जो सामाजिक दूरी का पालन करने का भान करा रहीं थीं। घास काट रहीं पूजा पांडे, आशा खुल्वे, गीता जोशी, जानकी देवी से खेती, किसानी का काम प्रभावित होने के सवाल पर वह कहने लगीं- भैय्या खेति त फिरि ले संभालि ल्यूल, ऐल त यो कोरोना वायरस बटि बचाव करण छू (भैय्या खेती तो फिर भी संभाल लेंगे, अभी तो कोरोना वायरस से बचाव करना है)। उन्होंने बताया कि सुबह 7 बजे से एक बजे तक जानवरों के लिए चारा काटने के साथ ही खेतों की देखरेख कर रही हैं। महिलाएं साथ मिलकर काम कर रही हैं, जिससे काम आसान हो जा रहा है।
बाकी समय टीवी देखकर, घर के काम कर गुजार रहीं
बागेश्वर। बिलौना की इन महिलाओं ने बताया कि दोपहर एक बजे के बाद खाना बनाने के साथ ही घर के अन्य काम कर रही हैं। शेष समय टीवी देखकर, आराम कर गुजार रही हैं। इनका कहना है कि यह समय संकट का समय है। सभी को नियमों का पालन करना चाहिए। इसी में सबकी भलाई है।