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पहाड़ों का कड़वा सच: घायल बसंती को स्ट्रेचर के सहारे पहुंचाया गया अस्पताल, ग्रामीणों को पुल निर्माण का इंतजार

Mon, 03 Nov 2025 01:58 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर

सार

पिंडर घाटी के सोराग गांव के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में मोटर मार्ग तो बन गया है, लेकिन पिंडर नदी पर पुल न होने के कारण मरीजों को स्ट्रेचर पर 6 किलोमीटर तक ढोकर सड़क तक लाना पड़ता है। 
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कपकोट के सोराग में घायल महिला को स्ट्रेचर के सहारे सड़क तक लाते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक ओर राज्य स्थापना दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। दूसरी ओर ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। ऐसे ही गांवों में पिंडर घाटी का सोराग गांव भी शामिल है। विडंबना है कि गांव के लिए मोटर मार्ग तो बन गया लेकिन पिंडर नदी पर पुल का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। मरीजों को डोली या स्ट्रेचर पर छह किमी पैदल सड़क तक लाना ग्रामीणों की नियति बन चुका है।

शनिवार को गांव की बसंती देवी (29) पत्नी उमेद सिंह पास के जंगल में घास काटने गई थी। वहां पैर फिसलने के कारण वह पहाड़ी से नीचे गिर गई। सूचना पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे जंगल से घर लाए। रविवार की सुबह ग्रामीण लोकपाल सिंह दानू, हिमांशु दानू, मोहन सिंह दानू, प्रवीण सिंह दानू आदि उन्हें स्ट्रेचर पर छह किमी दूर सड़क तक लाए। उंगिया से उन्हें वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। चिकित्सकों के अनुसार महिला को भर्ती किया गया है।

 

फरवरी 2024 में बनना था पुल

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ग्रामीणों ने बताया कि उंगिया से सोराग गांव के लिए वर्ष 2000 में 11 किमी सड़क स्वीकृत हुई थी। 2023 में सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो गया था। उंगिया से सोराग जाने के लिए पिंडर नदी को पार करना पड़ता है। नदी पर मोटर पुल बनाने के लिए वर्ष 2021 में टेंडर लगा दिए गए थे। कार्यदायी संस्था वॉप्कोश ने फरवरी 2024 तक पुल का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था। हालांकि अब तक पुल नहीं बन सका है। ग्रामीण नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुलिया बनाकर टैक्सी वाहन गांव तक चलाते थे। मानसूनकाल में पुलिया बहने से दो टैक्सियां गांव में फंसी हैं।

गर्भस्थ शिशु की हो गई थी मौत
पिंडर नदी पर पुल नहीं बनने के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी होने से एक गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। मई 2024 में सोराग गांव की महिला को प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीण स्ट्रेचर सड़क तक लाए। वाहन से पहले सीएचसी कपकोट, वहां से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। तब तक गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी थी।

 

उंगिया-सोराग मोटर पुल के निर्माण में हो रही देरी का मामला संज्ञान में है। पुल का निर्माण जल्द कराया जाएगा। -आकांक्षा कोंडे, डीएम बागेश्वर

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