बागेश्वर। जिले के गांवों में जहां पारंपरिक जल स्रोत सूखने से हाहाकार मचा है, वहीं ग्राम पंचायत जेठाई ने जल संरक्षण की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है। समुद्र तल से लगभग 1500 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस पर्वतीय गांव ने मनरेगा का बेहतर उपयोग कर पानी के संकट को दूर किया है। गांव में बने रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंकों के जरिये ग्रामीण अब हर साल औसतन 10 लाख लीटर वर्षा जल का संग्रहण कर रहे हैं।
भौगोलिक रूप से जटिल और 205.11 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जेठाई गांव की कुल जनसंख्या 621 है, जिसमें करीब 146 परिवार निवास करते हैं। अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां लंबे समय से पेयजल की भारी किल्लत रहती थी। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्राम पंचायत में वर्ष 2017-18 से मनरेगा के अंतर्गत रूफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंकों के निर्माण की शुरुआत की गई, जो वर्तमान तक जारी है। वीडीओ गोकुल रावत ने बताया कि गांव में अब तक कुल 55 जल संग्रहण टैंकों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
मनरेगा के तहत प्रत्येक टैंक के निर्माण पर करीब 60 हजार रुपये स्वीकृत हुए हैं। जिस पर अब तक कुल 26 लाख रुपये व्यय हुए हैं। प्रत्येक टैंक की जलधारण क्षमता 4-5 हजार लीटर है। गांव में बने सभी 55 टैंकों की कुल जलधारण क्षमता ढाई लाख लीटर है। सालभर में होने वाली बारिश के दौरान छतों से गिरने वाले पानी को इन टैंकों में सुरक्षित कर लिया जाता है। मानसून और शीतकालीन वर्षा को मिलाकर ग्रामीण हर साल औसतन 10 लाख लीटर पानी ले रहे हैं, जिसका उपयोग जलसंकट के दिनों में पीने और अन्य घरेलू कार्यों में किया जाता है।
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पर्वतीय क्षेत्रों में पानी की किल्लत को देखते हुए रूफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक सबसे कारगर है। जेठाई गांव ने मनरेगा बजट का बेहतरीन उपयोग किया है। ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में भी यह मॉडल लागू किया जाएगा ताकि वर्षा जल का संचयन हो सके।- आलोक भंडारी, बीडीओ., बागेश्वर