विधायक चंदन राम दास ने नगर में स्थानीय विकास प्राधिकरण लागू करने की अधिसूचना का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि वह मामले को विधानसभा में उठाकर तत्काल निरस्तीकरण की मांग करेंगे।
विधायक दास ने बताया कि कांग्रेस की पिछली सरकार ने गत 21 दिसंबर को गुपचुप तरीके से नगर में स्थानीय विकास प्राधिकरण लागू कर दिया जबकि राज्य में 25 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हुई।
तत्कालीन सरकार ने अधिसूचना जारी करने का समय ऐसा चुना ताकि लोग चुनाव आचार संहिता के कारण प्राधिकरण का विरोध ही न कर सकें।
एक तरफ नदियों से 200 मीटर की दूरी पर विकास कार्य कराने पर रोक लगी हुई है जिससे कई विकास कार्य प्रभावित हुए हैं, वहीं प्राधिकरण लागू होने से लोगों के गृह निर्माण से लेकर सरकारी और गैर सरकारी विकास योजनाएं प्रभावित हो जाएंगी।
भारी निर्माण शुल्क लगने से लोगों की परेशानी भी बढ़ेगी। पिछली सरकार के निर्णय को जनविरोधी बताते हुए कहा कि मामले को वह आठ जून से शुरू हो रहे विधानसभा की बैठक में उठाकर इसके निरस्तीकरण की मांग करेंगे।
पत्र मिलने की जेई की पुष्टि
स्थानीय विकास प्राधिकरण के जेई ओंकार त्यागी ने शासन से नगर में स्थानीय विकास प्राधिकरण लागू होने का पत्र मिलने की पुष्टि की है। बताया कि प्राधिकरण के तहत एसडीएम की अध्यक्षता में भवन समिति गठित हो गई है।
भवन निर्माण शुल्क के लिए तीन श्रेणी बनी हैं। इसके लिए आबादी वाले क्षेत्र में भवन बनाने के लिए लाभार्थी को 35 रुपये प्रति मीटर, मध्यम क्षेत्र में निर्माण के लिए 55 रुपये जबकि खुले क्षेत्र में भवन और अन्य निर्माण के लिए प्राधिकरण को 75 रुपये शुल्क देना होगा।
प्रस्तावित कार्य का नक्शा पास करने के अलावा अन्य औपचारिकताएं भी पूरी करनी होंगी। भवन समिति आवेदनों को अनुमोदित करके जिलाधिकारी को भेजेगी। डीएम के निर्देश पर उनके सचिव एडीएम लाभार्थी को स्वीकृति पत्र जारी करेंगे। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण की अब तक दो बैठकें भी हो चुकी हैं।