जिले में पुरातात्विक महत्व की धार्मिक विरासतों को संवारने की दिशा में राज्य संस्कृति विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में कवायद शुरू हो गई रही है। बागनाथ मंदिर के पास संग्रहालय बनाने के लिए भवन के आगणन की प्रक्रिया चल रही है। वहीं बैजनाथ के बद्रीनाथ मंदिर की मरम्मत के लिए धन मंजूर हो गया है। बैजनाथ में मूर्तियों के लिए संग्रहालय बनाने की दिशा में मंथन शुरू हुआ है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यहां बागनाथ मंदिर परिसर के कमरे में बंद 14 सौ साल पुरानी 60 पाषाण प्रतिमाओं के लिए संग्रहालय बनाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने मंदिर समिति की मांग पर धर्मशालाओं के पुनर्निर्माण का भी आश्वासन दिया था। डीएम भूपाल सिंह मनराल, संस्कृति विभाग के अल्मोड़ा संग्रहालय प्रभारी चंद्र सिंह चौहान, मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण किया। काल भैरव मंदिर के पास बहुउद्देश्यीय भवन बनाकर भूतल में धर्मशाला और पहले तल पर संग्रहालय बनाने का निर्णय हुआ।
इसमें काल भैरव मंदिर समिति ने भी सहमति दे दी है, इसके साथ ही बाणेश्वर मंदिर, प्राचीन गेट, चहारदीवारी, बागनाथ की प्राचीन धर्मशाला की मरम्मत करने की भी योजना है। संस्कृति विभाग के अल्मोड़ा संग्रहालय प्रभारी और अन्वेषण सहायक चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि संग्रहालय के लिए स्थल का चयन होने के बाद अब लोनिवि के माध्यम से आगणन बनाया जा रहा है। लोनिवि के अभियंता दो हफ्ता पूर्व निरीक्षण कर चुके हैं। आगणन बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इसी के आधार पर शासन से धन अवमुक्त होगा।
संग्रहालय प्रभारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि बैजनाथ के बद्रीनाथ मंदिर की दशा सुधारने के लिए राज्य सरकार ने 7.35 लाख रुपये मंजूर कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं की देखरेख में मंदिर को मौलिक स्वरूप के साथ संवारा जाएगा।
बागनाथ मंदिर की तरह बैजनाथ मंदिर समूह और आसपास के अन्य मंदिरों में एक सौ से अधिक पाषाण प्रतिमाएं हैं। जिन्हें एक ही स्थान पर एकत्र करके रखा गया है। यह मंदिर समूह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है। पुरातत्व विभाग के उत्तराखंड प्रभारी डॉ. बसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि बैजनाथ में संग्रहालय निर्माण की दिशा में विभाग के स्तर पर मंथन चल रहा है। इसके लिए भूमि, स्टाफ और अन्य संसाधनों का पहले इंतजाम करना है। पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा।