बागेश्वर। सुमगढ़ हादसे में मासूम भाई और मां-बाप को खोने के बाद 12 वर्षीय मासूम गुलशन सदमे में है। उसे यकीन ही नहीं हो रहा है कि उसके सिर से मां और पिता का साया उठ चुका है। छोटे भाई की हरकतों को याद करके गुलशन की आंखों से आंसू बहने लगते हैं। नियति ने पहले उससे उसकी मां छीन ली थी, अब पिता के साथ उसे अपने बेटे की तरह चाहने वाली दूसरी मां भी नहीं रही।
हादसे में जान गंवाने वाले गोविंद की पहली पत्नी का निधन करीब 9 वर्ष पूर्व नदी में बहने से हो गया था। पहली पत्नी से उनके दो बेटे हैं। बड़ा लड़का लक्की (15) पंजाब में बुआ मीरा देवी के साथ रहता है, जबकि छोटा बेटा गुलशन कक्षा 6 में पढ़ता है। शनिवार रात जब मकान पर भूस्खलन का कहर बरपा, वह भी अपने परिवार के साथ कमरे में सो रहा था। भूस्खलन की तेज आवाज सुनकर उसकी नींद खुली और जोर की आवाज लगाते हुए उसने बाहर की ओर दौड़ लगा दी। गुलशन के बाहर निकलते ही मकान धराशायी हो गया। मकान ध्वस्त होने की सूचना उसने घर से करीब दो सौ मीटर दूर रहने वाले परिजनों को दी।
पड़ोसी तत्काल मकान की ओर आए, लेकिन तब तक मकान के मलबे में गुलशन के माता-पिता और भाई दब गए थे। सुबह करीब आठ बजे से मकान का मलबा हटाने का काम शुरू हुआ तो गुलशन को उम्मीद थी कि उसके माता-पिता और भाई सकुशल बाहर आ जाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। नियति के आगे बेबस गुलशन ने माता-पिता और भाई के शव देखे तो वह बदहवास हो गया। ग्रामीण महिपाल सिंह और चंद्र सिंह ने बताया कि अपनी आंखों के सामने घर को खंडहर बनते और माता-पिता की मौत से गुलशन बुरी तरह से टूट गया है। हालांकि चिकित्सकीय जांच में उसे किसी प्रकार की चोट नहीं है, लेकिन कुदरत के दिए जख्मों ने उसे तोड़कर रख दिया है।
किस्मत को कोस रहे 66 वर्षीय बुजुर्ग पिता
बागेश्वर। सुमगढ़ हादसे में इकलौते पुत्र का परिवार गंवाने के बाद बुजुर्ग प्रताप सिंह पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। हादसे के समय वह घटनास्थल से दूर अपने भाई के घर पर थे। रविवार सुबह जैसे ही उन्हें यह मनहूस खबर मिली, वह तत्काल अपने घर पहुंचे। जवान बेटे, बहू और पोते का शव देेखकर वह सिर पकड़कर बैठ गए, जिस औलाद को उनके बुढ़ापे की लाठी बनना था, नियति ने उसी बेटे की अर्थी का बोझ उनके कांधों पर डाल दिया। गांव वालों ने उन्हें किसी तरह से ढांढस बंधाया। हालांकि वह रह-रहकर अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। पुत्र और बहू के जाने से बुढ़ापे में उनके सामने पोते की जिम्मेदारी भी आ गई है।