तीन नदियों के संगम की नगरी में ही बागेश्वर वासियों का गला तर नहीं हो पा रहा है। लोग कहीं टैंकर की लाइन में लग कर कहीं जंगल के धारे से पानी ढोकर प्यास मिटाने को मजबूर हैं। वहीं जल संस्थान के पेयजल आपूर्ति के दावे भी पानी-पानी हो गए हैं।
शहर में जल संस्थान से बिलौना से मंडलसेरा तक पानी की आपूर्ति करने में नाकाम रहा है। मंडलसेरा के पीपल चौक में पानी की आपूर्ति सुचारु की गई है लेकिन आबादी के घनत्व को देखते हुए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
नतीजा जल संस्थान वहां टैंकर भेजकर काम चल रहा है। इधर बिलौना में भी कमोबेश यही हालत है। यहां लोग कई किमी दूर धारे से पानी भरने को विवश हैं। महिलाएं सिर पर पानी का घड़ा भरकर घर तक पानी पहुंचा रही है। इधर जल संस्थान का दावा है कि पानी की आपूर्ति सुचारु की जाएगी।
रतजगा करने के बाद भी नहीं मिल रहा पानी
शहर के बीचों बीच चौरासी में भी पानी किल्लत से क्षेत्रवासी परेशान हैं। उनका आरोप है कि जल संस्थान रात को तीन बजे पानी की आपूर्ति कर रहा है। अब लोग रात-रात भर जाग रहे है तो कभी पानी नहीं आता है। ऐसे में रतजगा बेकार हो जाता है। लोग फिर मजबूर होकर सुबह तड़के ही सरयू नदी से पानी भरने जाते हैं।
क्या कहते हैं लोग
रात में तीन बजे पानी आता है, अब हम लोग सोए कि जागे समझ नहीं आता। अगर रात भर जागो तो भी नलों से पानी नहीं आता है। जल संस्थान को पेयजल आपूर्ति के ठोस नीति बनानी चाहिए। - नंद किशोर उपाध्याय, चौरासी
पानी आपूर्ति का कोई भी निश्चित समय नहीं है। रात भर जागो तो सुबह दुकान और ऑफिस में काम करने में परेशानी होती है। जल संस्थान को व्यवहारिक दिक्कत समझकर आपूर्ति करनी चाहिए। - विवेक तिवारी, चौरासी
नालियों से नहीं हटाई जा सकी पाइप लाइनें
अल्मोड़ा। पेयजल आपूर्ति के लिए नगर में कई स्थानों पर मुख्य लाइनें बिछी हैं। जल संस्थान ने लोगों को मुख्य लाइन से कनेक्शन दे रखे हैं। अधिकांश लाइनें रास्तों और इसके किनारे बनी नालियों से गुजर रही हैं। इस कारण पेयजल लाइन के जोड़ों और क्षतिग्रस्त स्थानों से नाली का गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता केएस खाती ने बताया कि नालियों से पाइप लाइनों को हटाने के लिए दो साल पहले 1.80 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था परंतु अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है।
पेयजल में निकला सांप
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। ग्राम पंचायत गनाई में नागर पेयजल योजना से जुड़े एक स्टैंड पोस्ट के पानी में सांप मिला है। अखेती निवासी दयाल नैनवाल ने बताया कि गनाई में किसी ने उन्हें स्टैंड पोस्ट से पीने के लिए लोटे में पानी दिया। गौर से देखने पर उसमें पतला सांप घूमते नजर आया। नैनवाल ने सांप को पानी सहित बोतल में रखकर अन्य लोगों को भी दिखाया। इधर लोगों का कहना है कि लंबे समय से पेयजल टंकी की सफाई न होने से यह स्थिति पैदा हो रही है जो जानलेवा है। इधर जल संस्थान के जेई ओमप्रकाश का कहना है कि टंकी की सफाई समय-समय पर की जाती है।
गांवों में एक माह से पेयजल संकट
रानीखेत (अल्मोड़ा)। सदे-मेहरगांव पेयजल पंपिंग योजना से सदे, महरगांव तल्ला, महरगांव मल्ला, रिखून, बरांखाल, लमरढोंग, बेल्जाण सहित सात गांव जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यहां आए दिन पानी की किल्लत रहती है। बीते एक माह से तो पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। राज्य आंदोलनकारी पान सिंह रावत ने बताया कि कुछ अन्य गांवों को मिलाकर इस योजना के नवीनीकरण की घोषणा पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने की थी, इसके लिए 17 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हुए थे लेकिन वर्तमान सरकार ने यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जलसंस्थान स्याल्दे के जेई प्रतीक चन्याल ने कहा कि पहले लोनिवि की रोड कटान के दौरान योजना की लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी, इसे अब ठीक कर दिया है, जल स्रोत का स्तर घटने के कारण दिक्कत आ रही है। पंपिंग का कार्य फिलहाल ठीक चल रहा है।
दूर नहीं हो पा रहा पेयजल संकट
अल्मोड़ा। जल संस्थान सड़क से लगे क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति कर रहा है। वहीं सड़कों के किनारे स्थापित हैंडपंप भी लोगों की प्यास बुझाने में कारगर साबित हो रहे हैं लेकिन सड़क से पैदल दूरी पर स्थित गांवों में लोगों को जल संकट से जूझना पड़ रहा है। हवालबाग विकासखंड के खड़कूना गांव के अलावा धौलादेवी ब्लॉक के पनुवानौला क्षेत्र के दर्जनों गांवों में पेयजल योजनों से पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जल संस्थान के ईई केएस खाती ने बताया कि मंगलवार को टैंकर से टकोली बैंड, बड्यूड़ा, डोल आश्रम, स्टेडियम, इंटर कॉलेज चितई और डीनापानी में पानी की आपूर्ति की गई।