बागेश्वर के भेरूचौबट्टा में खड़िया खदान के समीप क्षतिग्रस्त आंगन
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खनन के जरिए मोटी कमाई करने वाले कारोबारी तो मोटा मुनाफा कमा रहे हैं लेकिन खदानों के पास रहने वाले गांववाले हर पल घर गिरने के खतरे से जूझ रहे हैं। भैरूचौबट्टा गांव की तस्वीर आज यह है कि खड़िया खदानों की वजह से जमीन खिसक रही है। यहां मकानों की दीवारें चटक रही हैं और ग्रामीणों की रातें बेचैनी में गुजर रही हैं।
गांववालों का आरोप है कि खड़िया खनन का काम कई वर्षों से चल रहा है। इस बार हाईकोर्ट ने रोक लगाई तो खदान मालिक काम तो बंद कर गए लेकिन खदानों को भरना जरूरी नहीं समझा। नतीजा यह हुआ कि खदानों में पानी भरने लगा। इससे भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। गांव के कई मकानों की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। हर बारिश के बाद यह दरारें और चौड़ी हो जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी बड़े हादसे की आशंका है। इस वक्त 13 परिवारों के करीब 50 से अधिक लोग सीधे खतरे की जद में हैं।
सोमवार को भैरूचौबट्टा गांव के लोग क्षेत्र पंचायत सदस्य अनीता देवी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि अब खनन का खामियाजा वे क्यों भुगतें। ग्रामीणों की मांग साफ थी कि उन्हें सुरक्षित जगह पर विस्थापित किया जाए।
मुनाफा कारोबारियों का, खतरा गांववालों का
गांव के नवीन चंद्र, मंगल कुमार, जगदीश कुमार, जितेंद्र प्रसाद, केवल धौनी और भवानी शंकर का कहना है कि खनन से फायदा उठाने वाले लोग तो शहरों में ऐश कर रहे हैं, लेकिन यहां उनकी वजह से लोगों के सिर से छत छिनने की नौबत आ गई है।
ये हैं ग्रामीणों की मांगें
-प्रभावित परिवारों का तुरंत विस्थापन हो
-खदानों के गड्ढों का सुरक्षित भरान किया जाए
-मकानों में पड़ी दरारों का सर्वे हो और मुआवजा मिले
भेरूचौबट्टा के ग्रामीण मकानों के पास भूस्खलन की शिकायत लेकर पहुंचे थे। मामले में आपदा प्रबंधन विभाग को मौका मुआयना कर जांच के निर्देश दिए हैं। नियमानुसार प्रभावित परिवारों की हर संभव मदद की जाएगी। - आशीष भटगांई, डीएम, बागेश्वर