बागेश्वर के गैरपटा में रोजाना एक किलोमीटर दूर पानी की टंकी तक चक्कर लगाना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है। कपकोट ब्लॉक के पुड़कुनी ग्राम पंचायत के इस गांव में हर घर नल योजना के बावजूद नल सूखे पड़े हैं और लोगों को पेयजल के लिए कतार में लगकर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार टंकी भरने के लिए रात में भी पहरेदारी करनी पड़ती है।
ग्रामीणों के अनुसार घरों के पास कोई स्थायी जल स्रोत नहीं है। मवेशियों और घरेलू जरूरतों के लिए दिन में कई बार लंबी दूरी तय कर पानी ढोना पड़ता है। पानी के इंतजाम में ही पूरा दिन गुजर जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर घर नल, हर घर जल योजना का लाभ गांव तक नहीं पहुंच पाया है। जो पाइपलाइन बिछाई गई थी वह भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। लीकेज के कारण पानी आगे नहीं पहुंच पा रहा है। गर्मी का मौसम आते ही संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है।
पानी की लाइन में खड़े होकर एक से डेढ़ घंटे तक इंतजार करते हैं। यहां पानी मिलता नहीं है बहुत भीड़ होती है। हमें रात को भी पहरा देना पड़ता है। तब टंकी भरती है और लोग पानी भरकर घरों को ले जाते हैं। - कमला दानू, ग्रामीण गैरपटा
सरकार का हर घर जल का वादा यहां तो कहीं नजर नहीं आता। पुरानी लाइनें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। पूरे रास्ते में लीकेज है। बड़ी मुश्किल से किसी तरह पाइप को जोड़कर आगे तक पहुंचाते हैं। विभाग को कई बार अवगत कराने के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है। -इंदर सिंह दानू, ग्रामीण गैरपटा, फोटो 26 बीजीएस 05 पी
दिन में कम से कम पांच-छह चक्कर मवेशियों और घर की जरूरतों के लिए लगाने पड़ते हैं। सरकार हर घर नल और जल का दावा करती है लेकिन हमारे घरों तक तो न नल पहुंचे और न ही जल की बूंद टपकी। -हीरा देवी
पुड़कुनी ग्राम पंचायत की यह पेयजल योजना मूल रूप से सिंचाई विभाग कपकोट को जल जीवन मिशन के तहत आवंटित की गई थी। सिंचाई विभाग की ओर से योजना का निर्माण कराने के बाद ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दिया गया है। प्राकृतिक आपदा के कारण जो लाइनें और स्रोत क्षतिग्रस्त हुए हैं उनका आगणन शासन को भेज दिया गया है लेकिन अभी तक मरम्मत के लिए धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। बजट मिलते ही सुधार कार्य शुरू किया जाएगा। -दलीप सिंह बिष्ट, ईई जल संस्थान