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पोर्टल से गायब हुए रिक्त स्कूल: शिक्षकों के तबादलों पर सवाल, बोले- नियमों की बलि चढ़ा तबादला एक्ट 2017

Thu, 03 Sep 2026 05:12 PM IST
Heera कमल कांडपाल

सार

बागेश्वर में प्राथमिक शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। विभाग द्वारा वेबसाइट पर जारी रिक्ति सूची और शिक्षकों को उपलब्ध कराए गए विकल्पों में अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 
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वेबसाइट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बागेश्वर में प्राथमिक शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। विभाग की ओर से वेबसाइट पर जारी रिक्ति सूची और तबादले के दौरान शिक्षकों को उपलब्ध कराए गए विकल्पों में अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षकों ने उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के प्रावधानों की अनदेखी और प्रक्रिया में मनमानी के आरोप लगाए हैं।

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शिक्षकों का दावा है कि वेबसाइट पर रिक्त दर्शाए गए राजकीय प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़, पंद्रहपाली और द्यांगण को आवेदन के समय पोर्टल पर विकल्प के रूप में प्रदर्शित नहीं किया गया। इससे इन विद्यालयों में स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षक आवेदन में उनका विकल्प नहीं भर सके। आरोप है कि रिक्तियां सार्वजनिक करने और पोर्टल पर विकल्प उपलब्ध कराने में बरती गई इस विसंगति से कई पात्र शिक्षक प्रभावित हुए। 

गलत जानकारी से विकल्प चुनने में परेशानी
शिक्षकों के अनुसार, रिक्ति सूची में जिले के अधिकांश विद्यालयों में छात्र संख्या 10 से कम और कई विद्यालयों में पांच से भी कम दर्शाई गई यदि इन विद्यालयों में स्थानांतरण अनुमन्य नहीं था तो इसकी स्पष्ट जानकारी सूची में दी जानी चाहिए थी। थी। शिक्षकों का कहना है कि अस्पष्ट जानकारी के कारण वे सही विकल्प नहीं भर पाए।
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शिक्षकों ने छात्र संख्या को लेकर विभाग पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया है। वरिष्ठ और पात्र आवेदकों को यह कहते हुए इच्छित विद्यालयों का विकल्प नहीं दिया गया कि वहां छात्र संख्या 10 से कम है। इसी श्रेणी में कनिष्ठ शिक्षकों का गरुड़ ब्लॉक के विद्यालय दर्शानी में छात्र संख्या नी होने के बावजूद स्थानांतरण किया गया।

शिक्षकों का आरोप है कि स्थानांतरण अधिनियम-2017 की धारा 13(3) के तहत पति-पत्नी श्रेणी और धारा 13 (4) के तहत गंभीर बीमारी व दिव्यांगता के आधार पर किए गए आवेदनों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई। आरोप है कि वरिष्ठतम आवेदकों के पहले और दूसरे विकल्पों को दरकिनार कर दिया गया जबकि उनके पहले विकल्प वाले विद्यालय रिक्त थे। पहले विकल्प के उपलब्ध होने के बावजूद कुछ वरिष्ठ आवेदकों को दूसरा विकल्प दिया गया। इससे पात्र शिक्षक अपने इच्छित स्थान पर स्थानांतरण से वंचित रह गए। शिक्षकों का कहना है कि चालू सत्र में हाईकोर्ट की ओर से सुगम-दुर्गम श्रेणी समाप्त किए जाने के बाद अनुरोध के आधार पर आवेदन करने वाले पात्र शिक्षकों को रिक्तियां उपलब्ध होने पर स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल किया जाना था।

शिक्षकों के ट्रांसफर और विभागीय स्तर पर मिल रही शिकायतों को सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है। जिला स्तर पर हुए तबादलों के संबंध में जो भी आवेदन या शिकायतें प्राप्त होंगी, उनके आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री उत्तराखंड सरकार

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