बागेश्वर में उत्तरायणी मेले को लेकर बैठक लेते डीएम। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। उत्तरायणी मेले पर ओमिक्रॉन का ग्रहण लग गया है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए मेले की अवधि को घटाकर तीन दिन कर दिया गया है जबकि पहले मेला सप्ताहभर से अधिक चलता था। मेला भव्य होने की बजाय अब स्थानीय स्तर पर आयोजित किया जाएगा। मेले के दौरान मेलार्थी धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। उत्तरायणी में बाहर से आने वाले व्यापारियों की दुकानें नहीं सजेंगी और नुमाइशखेत में सांस्कृतिक मंच से केवल स्थानीय लोक कलाकार ही प्रस्तुति देंगे।
जिला कार्यालय सभागार में शनिवार को डीएम विनीत कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओमिक्रॉन संक्रमण की रोकथाम के बीच मेले के आयोजन पर चर्चा की गई। डीएम ने कहा कि संक्रमण को फैलने से रोकना सबकी जिम्मेदारी है। इसके लिए मेले में अनावश्यक भीड़ को रोकना होगा। कहा कि जनहित में मेले की अवधि को कम किया जाएगा। बाहरी राज्यों से आने वाले व्यापारियों और बाहरी प्रदेशों के कलाकारों को भी मेले में आमंत्रित नहीं किया जाएगा।
उन्होंने व्यापारियों से मेले के दौरान मेलार्थियों को उचित दरों पर सामान उपलब्ध कराने के लिए कहा। बैठक में मेले के दौरान ओमिक्रॉन संक्रमण नियंत्रण के लिए शासन से जारी गाइडलाइन के अनुसार कार्यक्रम करने पर सहमति बनी। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल, ब्लॉक प्रमुख पुष्पा देवी, एसपी अमित श्रीवास्तव, सीडीओ डीडी पंत, एडीएम चंद्र सिंह इमलाल, मेलाधिकारी हर गिरी, रेडक्रॉस चेयरमैन संजय साह जगाती, व्यापार मंडल अध्यक्ष हरीश सोनी, महामंत्री अनिल कार्की, सभासद नीमा दफौटी, दीपक खेतवाल आदि रहे।
भव्य आयोजन की आस लगाए लोगों को निराशा
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले की अवधि को सीमित करने और लोकल मेला आयोजित करने की सहमति के बाद भव्य आयोजन की आस लगाए लोगों को निराशा हाथ लगेगी। उत्तरायणी जिले का प्रमुख मेला है, जहां मेले के दौरान बाहरी व्यापारियों की दुकानें सजती हैं। दुकानों से लोग रोजमर्रा का सामान खरीदते हैं। साल भर खरीदारी के लिए लोग उत्तरायणी का इंतजार करते हैं। कला प्रेमियों को विभिन्न प्रदेशों की संस्कृति और कला से परिचित होने का मौका मिलता है। इस साल भी मेला सीमित होने से लोगों को सादगी के साथ उत्तरायणी मनानी पड़ेगी।