बागेश्वर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश कुमार सिंह ने अवैध रूप से बंदूक रखने के एक आरोपी को दो वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। घटनाक्रम के अनुसार 10 फरवरी 2015 को अवैध कटान की सूचना मिलने पर राजस्व उपनिरीक्षक नरेश चंद्र पुनेठा राजस्व कर्मियों के साथ कपकोट तहसील क्षेत्र के सुमगढ़ गांव गए थे।
इस दौरान उन्हें मोहन सिंह नामक व्यक्ति बंदूक के साथ गांव में घूमता नजर आया। जब उससे बंदूक का लाइसेंस मांगा गया तो वह नहीं दिखा पाया। इस पर राजस्व उपनिरीक्षक ने बंदूक को कब्जे में लेकर मोहन सिंह के विरुद्घ कपकोट थाने में रिपोर्ट लिखाई। मामले की विवेचना एसआई सत्यप्रकाश रायपा ने की। यह मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चला।
इस मामले में सरकार की ओर से पैरवी अभियोजन अधिकारी ललित मोहन आर्य ने की। सभी तथ्यों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश कुमार सिंह ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी मोहन सिंह को दो वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में यह भी कहा गया कि स्वतंत्र साक्षी के साक्ष्य को नकारा नहीं जा सकता।
अन्वेषण में यदि त्रुटि है तो इसका लाभ अभियुक्त को नहीं दिया जा सकता है। न्यायालय द्वारा यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों में परवीक्षा का लाभ नहीं दिया जा सकता है क्योंकि विधायिका द्वारा न्यूनतम दंड का प्रावधान किया गया है।