कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) काफलीगैर में कृषकों का तीन दिनी प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार से शुरू हुआ। जिसमें कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि गेहूं बीएल 829, 616 से अनाज बढ़ेगा। चारा भी मिलेगा। किसानों को बुवाई से पहले कृषि के वैज्ञानिक आधार को बारीकी से समझना चाहिए। वैज्ञानिक आधार से की गई कृषि से जहां पैदावार बढ़ती है, वहीं आय भी दोगुनी होती है। इससे पशुधन को नए आयाम मिलते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नवल किशोर सिंह ने कृषकों को शीतकाल में चारा प्रबंधन के तहत चारा फसल जई, बरसीम बहुवर्षीय राई, चारा प्रजाति के भीमल, तिमुल, बांज, खड़िक क्वैराल आदि की उपयोगिता, कुशल प्रबंधन के साथ साथ पशुओं में इसके खाने से पड़ने वाले प्रभाव बताए गए। अधिक जाड़े से पशुओं को बचाने के लिए उचित आवास प्रबंधन, पशु आहार में गुड़, खल के इस्तेमाल पर जोर दिया।
पादप विशेषज्ञ हरीश जोशी ने फसलों में कीट रोग प्रबंधन की जानकारी दी। मेदिनी प्रताप सिंह ने प्रक्षेत्र में लगी फसल दिखाई। जिसके माध्यम से रबी फसलों में कीट, बीएल गेहूं 829, बीएल गेहूं 616 प्रजाति के गेहूं के द्विउद्देशीय गुण, चारा, अनाज प्रबंधन के टिप्स दिए। वहां पूर्व प्रधान करम सिंह, बंशी लाल, हयात सिंह, उम्मेद सिंह, आजीविका हरीश चंद्र जोशी, चिराग संस्था के विनोद पांडे आदि थे।