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Bageshwar News: सैलानियों को सदाएं दे रहीं पिंडारी की बर्फीली वादियां

Thu, 10 Apr 2025 11:15 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
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लोनिवि ने पूरा किया ट्रैक की मरम्मत का कार्य, पिछले साल 1822 देशी-विदेशी पर्यटकों ने की थी सैर
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बागेश्वर। जिले का विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर रोमांच के शौकीन लोगों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। आगामी 15 अप्रैल से ग्लेशियर देशी-विदेशी ट्रैकरों के लिए खुल जाएंगा। पर्यटन सीजन शुरू होने से पूर्व लोनिवि ने ट्रैकिंग रूट की मरम्मत का काम पूरा कर लिया है। पिछली बार 1822 देशी और विदेशी सैलानी ग्लेशियरों की सैर करने पहुंचे थे। इस साल यह आंकड़ा बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

पिंडारी ग्लेशियर की सैर करने के लिए विश्वभर के लोग पहुंचते हैं। वर्ष 1830 में अंग्रेज घुमक्कड़ सर विलियम ट्रेल ने सूपी गांव के मलक सिंह के साथ पिंडारी ट्रैक की खोज की थी। उनके नाम पर ही पिंडारी के एक दर्रे को ट्रेल दर्रे के नाम से जाना जाता है। ग्लेशियर की सैर के लिए आने वाले ट्रैकरों और सैलानियों पर क्षेत्र के खाती, वाछम, जातोली गांवों के करीब 200 गाइड, पोर्टर, होम स्टे, हट संचालकों की आजीविका चलती है। घोड़े-खच्चर संचालक और वाहन मालिक-चालकों को भी कमाई के लिए सैलानियों और ट्रैकरों का इंतजार रहता है।
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ऐसे पहुंचें पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी

बागेश्वर। पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियर पर जाने के लिए जिला मुख्यालय से खाती गांव तक 70 किमी की दूरी वाहन से तय की जाती है। खाती से 12 किमी की पैदल दूरी तय कर द्वाली पहुंचा जाता है। यहां से एक रास्ता पिंडारी और एक कफनी को जाता है। द्वाली से पांच किमी की दूरी तय कर फुर्किया पहुंचा जाता है। यहां से सात किमी की दूरी तय कर पिंडारी के जीरो प्वाइंट पहुंचते हैं। द्वाली से कफनी ग्लेशियर की दूरी करीब 12 किमी है। सुंदरढूंगा जाने के लिए खाती से पांच किमी दूर जातोली पहुंचते हैं। यहां से 11 किमी की दूरी तय कर कठलिया पहुंचते हैं। इस स्थान को मैकतोली, बैलूनी टॉप, देवीकुंड ट्रैक के बेस कैंप के रूप में भी जाना जाता है।



कफनी रूट की ट्रैकिंग के लिए करना पड़ेगा इंतजार

बागेश्वर। लोनिवि के ईई अमित पटेल ने बताया कि खाती से पिंडारी जीरो प्वाइंट तक ट्रैक की मरम्मत का काम पूरा हो गया है। सुंदरढूंगा रूट पर लकड़ी के पुल के स्थान पर पक्का पुल बनाने का काम जल्द शुरू होने वाला है। कफनी रूट पर 2013 की आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए ट्रैक रूट की 98 लाख रुपये से मरम्मत की जानी है। रूट की मरम्मत होने के बाद ही कफनी की ट्रैकिंग सुचारू होगी। पिंडारी और सुंदरढूंगा रूट पर कोई दिक्कत नहीं है।



ठहरने के लिए पर्यटन विभाग और लोनिवि के अतिथि गृह

बागेश्वर। पिंडारी ग्लेशियर रूट पर पर्यटन विभाग के पांच लोहारखेत, धाकुड़ी, खाती, द्वाली, फर्किया और लोनिवि के खाती, द्वाली, फुर्किया में तीन अतिथि गृह बने हैं। खाती और वाछम में होम स्टे और हट में भी ठहरने के पर्याप्त इंतजाम रहते हैं।





जैंकुनी में वन विभाग की चौकी में होगा पंजीकरण

बागेश्वर। वन विभाग की एसडीओ तनुजा परिहार ने बताया कि खाती से पहले जैंकुनी में वन विभाग की चौकी बनी है। ग्लेशियर की यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक नागरिक का वहां पंजीकरण कराया जाएगा। देशी सैलानियों के लिए पहले तीन दिन का पंजीकरण शुल्क 100 इसके बाद प्रतिदिन 125, जबकि विदेशियों के लिए 125 और 225 का शुल्क निर्धारित है। देशी विद्यार्थियों के लिए पहले तीन दिन का 75 फिर 150 प्रतिदिन, विदेशी विद्यार्थियों के लिए 100 और 175 रुपये पंजीकरण शुल्क रखा गया है। टेंट, घोड़ा, खच्चर, डोरमैट्री आदि के लिए अलग से पंजीकरण शुल्क देना होगा।





पिछले साल आए सैलानियों का विवरण

बागेश्वर। वन विभाग में पंजीकरण की सूची के अनुसार वर्ष 2024 में पिंडारी ग्लेशियर की सैर करने वालों में 291 महिला और 1079 पुरुष समेत 1370 देशी और 68 महिला, 84 पुरुष समेत 152 विदेशी सैलानी शामिल थे।
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ग्लेशियरों की सैर पर आने वालों को हरसंभव सुविधा दी जाएगी। पिंडारी ट्रैक की मरम्मत हो चुकी है। होम स्टे संचालकों से ट्रैकरों से मनमाना किराया नहीं लेने के लिए कहा गया है। समय-समय पर विभाग की ओर से निरीक्षण का व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की जाएगी।

पीके गौतम, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, बागेश्वर
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