बागेश्वर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने साइबर अपराध के एक मामले में आरोपी को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार पालड़ीछीना निवासी भूपेंद्र सिंह जनौटी ने 31 जुलाई 2021 को बागेश्वर कोतवाली में एफआईआर कराते हुए कहा कि न्यूजीलैंड से एक वेबसाइट के जरिए जॉब आफर आया। उन्होंने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया। वीजा अटार्नी सारा अलीसा ने वीजा पंजीकरण और पासपोर्ट के लिए विभिन्न खातों में 18 लाख रुपये की रकम डलवाई। सारा अलीसा ने उत्तम जमातिया निवासी सीलघाटी दक्षिण त्रिपुरा के बैंक खाते में 67 हजार रुपये मंगवाए। पुलिस ने आरोपी उत्तम जमातिया को गिरफ्तार कर लिया।
एसआई पंकज जोशी ने मामले की प्रथम विवेचना की। आईटी एक्ट में कुछ धाराओं में बढ़ोतरी होने पर 19 दिसंबर 2021 को विवेचना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक जगदीश सिंह ढकरियाल को सौंपी गई। पुलिस ने 21 जनवरी 2022 को न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। आरोपपत्र के आधार पर तीन मार्च 2022 को आरोप विरचित किए गए। 11 अप्रैल 2022 को अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य प्रारंभ किए। अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों को परीक्षित किया।
बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजु मुंडे ने आरोप सही पाते हुए आरोपी उत्तम जमातिया को आईपीसी की धारा 420, धारा 120 बी और धारा 66 डी सूचना एवं प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत दोषी पाते हुए धारा 420/120 बी तीन वर्ष का कठोर कारावास, बीस हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। धारा 66 डी आईटी एक्ट में तीन वर्ष का कठोर कारावास, 230 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारवास की सजा भुगतनी होगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी नामिका अधिवक्ता मोहन राम ने की।