फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सैलानियों से अछूती है बिचला दानपुर के बुग्यालों की दुनिया

विज्ञापन
बोश्वर के बिचला दानपुर स्थित लोधुरा बुग्याल का बर्फबारी के दौरान का विहंगम नजारा। (फाइल फोटो) - फोटो : BAGESHWAR
विज्ञापन
बागेश्वर(शंकर पांडेय)। कुदरत ने देवभूमि उत्तराखंड को कई खूबसूरत नेमतों से नवाजा है। इनमें प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़, झरने, बुग्याल आदि शामिल हैं। जिले में भी कई ऐसे दर्शनीय स्थल हैं, जिनका दीदार करने के लिए हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। हालांकि कुछ स्थान अब भी सैलानियों की नजरों से दूर हैं। ऐसे ही खूबसूरत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हैं- बिचला दानपुर में लीती गांव की सीमा से सटे हरे-भरे मखमली घास के बुग्याल। साहसिक खेलकूद स्नो स्कीइंग, ट्रेकिंग की भरपूर संभावनाओं को समेटे इन बुग्यालों की लंबी श्रृंखला को शासन और प्रशासन की विकास भरी नजर का इंतजार है।
विज्ञापन

जिला मुख्यालय से लीती गांव की दूरी 55 किलोमीटर है। लीती के रिठकुला तोक की सीमा से शुरू होता है बुग्यालों का सफर। लीती से सात किमी की सीधी चढ़ाई पार करके लोधुरा बुग्याल तक पहुंचा जाता है। लोधुरा बुग्याल लीती के ग्रामीणों के मवेशियों की चरागाह के रूप में भी जाना जाता है। लोधूरा से तीन किमी की हल्की चढ़ाई के बाद बुंगा बुग्याल आता है। बुग्यालों की श्रृंखला का अगला पड़ाव कुरड़र्खा बुग्याल है, यह बुंगा से ढाई किमी की हल्की चढ़ाई पार करने के बाद पड़ता है। यहां से तीन किमी की हल्की चढ़ाई और उतार पार करने के बाद लमतरा बुग्याल मिलता है। लमतरा से आगे चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद डांगू बुग्याल के दीदार होते हैं। डांगू से आगे छवेली बुग्याल आता है। यहां तक पहुंचने के लिए चढ़ाई, समतल और उतार भरे रास्ते को पार करना पड़ता है। अगला बुग्याल चनड़िया है, जहां जाने के लिए छवेली से छह किमी का रास्ता पार करना पड़ता है। चनड़िया से आठ किमी की चढ़ाई के बाद राजला बुग्याल आता है। राजला से ढाई किमी की हल्की चढ़ाई देवीकुंड तक पहुंचाती है। देवीकुंड के आगे भी छोटे-छोटे बुग्याल मौजूद हैं, हालांकि यह क्षेत्र अक्सर बर्फ से ढका रहता है। (संवाद)
साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं
बागेश्वर। बर्फबारी के दौरान बुग्यालों में स्कीइंग कराई जा सकती है। गर्मी के मौसम में भी बुग्याल सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। अगर बुग्यालों को पर्यटन के दायरे में लाकर विकसित किया जाए तो शामा, लीती, रातिरकेटी सहित क्षेत्र के तमाम गांवों में रोजगार की संभावनाएं बढे़ंगी। शामा निवासी नरेंद्र कोरंगा कहते हैं कि क्षेत्र के भी कुछ ही लोग बुग्यालों की सैर कर सके हैं। बुग्यालों की खूबसूरती को देश, दुनिया के नक्शे तक लाने के लिए सरकार और पर्यटन विभाग को पहल करनी चाहिए।
विज्ञापन

नंदा राजजात के लिए ब्रह्म कमल लाने का रूट भी हैं बुग्याल
बागेश्वर। बिचला दानपुर के इन बुग्यालों से होकर लीती के ग्रामीण नंदाष्टमी पर होने वाली पूजा के लिए ब्रह्म कमल लेने जाते हैं। इसके लिए ग्रामीण लोधूरा, ढांगू और चनड़िया ट्रेक से होकर देेवीकुुंड पहुंचते हैं।
भागदौड़ भरी दुनिया में सकून की तलाश पूरी करते हैं बुग्याल
बागेश्वर। लोधूरा बुग्याल को लीती के ग्रामीणों के मवेशियों की चरागाह के रूप में जाना जाता है। अप्रैल की शुरूआत होते ही गांव के लोग पशुओं को इन चरागाहों में ले जाते हैं। सर्दियों के दिनों में नवंबर से मार्च तक यहां बर्फ गिरती है। इस दौरान ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर वापस गांव को लौट आते हैं। लोधुरा के ट्रेकिंग पर गए दीपक बिष्ट, नरेंद्र करायत बताते हैं कि जिले के सबसे खूबसूरत स्थानों में से बिचला दानपुर के बुग्याल शामिल हैं। इन बुग्यालों में जिंदगी की भागदौड़ के बीच सुकून का अहसास होता है।
बिचला दानपुर के बुग्यालों में पर्यटन की संभावनाएं तलाशने के लिए क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के बाद पर्यटन और साहसिक खेलों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
विज्ञापन

- कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें