गरुड़ (बागेश्वर)। पहाड़ की लाइफलाइन माने जाने वाली केमू धीरे-धीरे सिकुड़ रही है। टैक्सी वाहनों की भीड़ में कई बसों का संचालन बंद हो गया है। कोरोना काल में भी कई रूटों पर बसों का संचालन बाधित हो गया था। आज भी लोगों को इन सेवाओं के सुचारू होने का इंतजार है।
कोविड काल में रानीखेत-ओगला, ग्वालदम-धारचूला, ग्वालदम-पिथौरागढ़, हल्द्वानी-गरुड़-जखेड़ा और हल्द्वानी-सौंग बसों का संचालन बंद हो गया था। महामारी का दौर गुजरने के बाद जखेड़ा और सौंग के लिए कुछ दिन तक बसों का संचालन किया गया लेकिन जल्द ही फिर से सेवाएं बाधित हो गईं। ग्वालदम से संचालित होने वाली बसों के बंद होने का असर क्षेत्रवासियों की दिनचर्या पर अधिक पड़ रहा है। क्षेत्र के काश्तकार, व्यापारी, नौकरीपेशा लोगों को गरुड़ बाजार आने के लिए टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है। जेब पर अधिक मार पड़ने से लोगों का बजट गड़बड़ा जाता है। संवाद