बागेश्वर। दिव्यांग होने के बाद कई लोग उसे अपनी कमजोरी समझकर भाग्य को कोसते हैं लेकिन दाड़िमखेत की गुड़िया दोसाद ने दिव्यांगता के बाद भी हार नहीं मानी।
2021 में पिता के निधन के बाद गांव में ही पिता की सस्ते गल्ले की दुकान संभालने के साथ उन्होंने लोगों की परेशानियों का समाधान किया। वह सबका सहारा बनीं तो लोगों ने भी उसे सिर-माथे बिठाया और गांव की प्रधान चुना।
गुड़िया जिले के दिव्यांगों के लिए मिसाल बन गई हैं। एक पैर के नहीं होने से गुड़िया 50 प्रतिशत दिव्यांग हैं। वर्ष 2021 में गुड़िया हल्द्वानी से एमए की पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान गांव में दुकान और सस्ता गल्ला वितरण करने वाले उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी गुड़िया पर आ गई।
उन्होंने पिता की दुकान और राशन वितरण का कार्य संभाला। इसके बाद वह अपनी मां और भाई के लिए उम्मीद की किरण बनीं। दुकान में राशन वितरण के दौरान आने वाले ग्रामीणों की कई परेशानियों का हल गुड़िया कर देती थी जिससे ग्रामीणों ने बीते पंचायत चुनावों में उन्हें ग्राम पंचायत दाड़िमखेत-छानीसेरा से ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। चुनाव परिणाम भी गुड़िया के पक्ष में रहा। गुड़िया ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 23 वोटों से हराकर प्रधान की कमान संभाली।