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कुमाऊं में बढ़ता पलायन: सुविधाओं के अभाव में सूना होता जा रहा नरगड़ा, 70% आबादी गांव से बाहर

Thu, 12 Mar 2026 12:46 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी

सार

बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र का नरगड़ा गांव पलायन की मार झेल रहा है जहां 69 घरों में से अधिकतर में ताले लटके हैं और करीब 70 प्रतिशत आबादी गांव छोड़ चुकी है।
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कपकोट के नरगड़ा गांव में पलायन से बंद पड़ा मकान। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बागेश्वर जिले के कपकोट में सात तोकों से मिलकर बना नरगड़ा गांव वीरानी की चादर ओढ़ने लगा है। गांव में 69 घर हैं लेकिन अधिकांश के ताले महीने में एक-दो बार खुलते हैं। 70 फीसदी आबादी गांव से बाहर रहती है। बाकी घर बुजुर्गों की सांसों के दम पर आबाद हैं।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार गांव में 91 परिवार रहते थे। सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार आदि सुविधाओं की तलाश में लोग धीरे-धीरे गांव छोड़ते चले गए। गांव के अधिकतर युवा प्रवासी बन गए हैं। वे शादी, जनेऊ या पूजा पाठ आदि शुभ कार्यों पर ही गांव आते हैं। अधिकांश घरों में बुजुर्ग और महिलाएं रहती हैं। गांव से मोटर मार्ग तक पहुंचने के लिए तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। यहां से वाहन की मदद से  17 किमी की दूरी तय कर तहसील मुख्यालय पहुंचा जाता है। मजबूरी में ग्रामीण चढ़ाई चढ़ने की बजाय आठ किमी पैदल दूरी तय कर तहसील मुख्यालय आते हैं।

स्कूल तो है लेकिन विद्यार्थियों की कमी नरगड़ा गांव में प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल हैं लेकिन विद्यार्थियों की कमी है। पलायन के कारण प्राथमिक स्कूल में मात्र तीन विद्यार्थी बचे हैं और स्कूल पर बंद होने की खतरा मंडरा रहा है। वर्ष 2025 की वोटर लिस्ट के अनुसार गांव में 207 मतदाता हैं लेकिन इनमें 70 प्रतिशत नियमित रूप से गांव में नहीं रहते हैं। सड़क नहीं होने से अधिकांश प्रवासी गांव आने से भी कतराते हैं।

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हमने तो जैसे-तैसे उम्र गुजार दी लेकिन बच्चों के लिए बहुत परेशानी है। जंगली जानवरों ने लोगों से खेती छुड़ा दी। आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों ने गांव छोड़ गए। उम्र के चौथे पड़ाव में पहुंचे हम लोग एक-एक कर लोगों को गांव से जाते देखने को मजबूर हैं।-मोहनी देवी

बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि सुविधाओं की तलाश में युवाओ ने गांव छोड़ दिया है। बुजुर्गों का मन शहरों की तंग गलियों में नहीं लगता है तो वह गांवों में हैं। जो लोग आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं वह मजबूरी में गांव में रहते हैं।-गीता देवी
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गांव को सड़क से जोड़ने की मांग करते-करते ही कई घर खाली हो गए। गांव में बंदर, जंगली सुअर, तेंदुआ जैसे हिंसक वन्य जीवों की दहशत बनी रहती है। शासन-प्रशासन लोगों की आवाज को सुनना नहीं चाहता। मजबूरी में पलायन करना लोगों की नियति बन रहा है।-तारा सिंह

मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गांव बंजर पड़ गया है। कई बार सड़क की मांग को लेकर गुहार लगाई लेकिन अधिकारियों से लेकर नेताओं तक ने हर बार ठगा है। गांव का सड़क से नहीं जुड़ना भी पलायन का प्रमुख कारण है।-मनोज सिंह, ग्राम प्रधान

गांवों से पलायन रोकने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। अधिक पलायन वाले गांवों में पलायन रोकथाम योजना के तहत भी कार्य कर लोगों को रिवर्स पलायन के लिए जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।-आरसी तिवारी, सीडीओ, बागेश्वर

 

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