सरयू सहित अन्य धार्मिक महत्व की नदियों की पवित्रता के लिए साम, दाम, दंड, भेद वाली नीति चलेगी। इसके लिए सबसे पहले प्रशासन लोगों से नदियों में कूड़ा न डालने का अनुरोध करेगा। जो लोग इसको नजरअंदाज करेंगे उनका चालान काटा जाएगा। इसके बाद भी अगर लोग नदियों में कूड़ा डालने से बाज नहीं आए तो उन्हें पांच हजार रुपये के अर्थदंड के साथ ही छह माह के कारावास की सजा भी भुगतनी होगी। नगरपालिका ने नदियों की निगरानी शुरू कर दी है।
बागेश्वर में मोक्ष दायिनी सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के रूप में माने जाने वाली भागीरथी को कूड़ाघर बनाया गया है। शहर भर की गंदगी इन्हीं नदी नालों में बहाई जाती है। घरों का कूड़ा भी लोग सीधे नदियों में डाल देते हैं। नदियों का विशेष धार्मिक महत्व होने से सरयू और गोमती संगम पर पवित्र स्नान के लिए हर साल हजारों की संख्या में देश के कोने-कोने से लोग आते हैं। नदियों में गंदगी के कारण उत्तरायणी सहित तमाम धार्मिक अवसरों पर स्नान के लिए आने वाले लोगों की भावनाएं आहत होती है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन नदियों की सफाई को लेकर सख्त हो गया है। नदियों की सफाई के लिए बागेश्वर में अब साम, दाम, दंड, भेद की नीति चलेगी। इसके तहत नदियों में कूड़ा डालने वाले लोगों को समझाया जाएगा। जो लोग इस अनुरोध को ठुकराएंगे उनका चालान किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कोई व्यक्ति नदी, नालों में कूड़ा करकट डालते पकड़े गए तो उन पर पांच हजार का जुर्माना लगाने के साथ ही जेल की सजा भी भुगतनी होगी।
जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के निर्देश पर नगरपालिका ने नदियों की निगरानी का काम शुरू कर दिया है। बागेश्वर के ईओ ईश्वर सिंह रावत ने बताया कि जिन स्थलों में लोग कूड़ा डालते आ रहे हैं वहां पर सुबह शाम कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। पालिका कर्मी नदियों के किनारे लगातार नजर बनाए रखेंगे। अगले चार दिनों तक कूड़ा डालने वालों को समझाया जाएगा। इसके बाद भी यदि नदियों को गंदा किया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर में पालीथिन के प्रयोग पर भी पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।