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पीएम मोदी को नहीं भा रही उत्तराखंड में मनरेगा

Wed, 21 Sep 2016 10:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़, बागेश्वर
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पीएम मोदी को शायद मनरेगा योजना रास नहीं आ रही है। मनरेगा एक्ट के तहत श्रमिकों को 15 दिन में मजदूरी का भुगतान करने का प्रावधान है। लेकिन केंद्र से मजदूरों के खातों में 12 अगस्त के बाद से एक रुपया नहीं मिला है। केंद्र सरकार पर राज्य के मनरेगा श्रमिकों की 31 करोड़ रुपये की उधारी चढ़ गई है। मजदूरी का भुगतान न होने से श्रमिकों को  खाने के लाले पड़ गए है। सीएम हरीश रावत का कहना है कि मजदूरों की मजदूरी का भुगतान करने में मोदी सरकार आखिरकार हाथ क्यों खींच रही है।
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 मनरेगा योजना के तहत उत्तराखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों में मनरेगा के काम कर रहे मजदूरों के बैंक और पोस्ट ऑफिस के खातों में केंद्र सरकार ने 12 अगस्त से एक रुपया अवमुक्त नहीं किया है। जबकि मनरेगा एक्ट 2005 के तहत मजदूरों को 15 दिन के अंदर मजदूरी का भुगतान करने का प्रावधान है। लेकिन उत्तराखंड के मनरेगा के तहत कार्यशील मजदूरों को डेढ़ माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। जिला विकास अधिकारी बागेश्वर डॉक्टर महेश कुमार का कहना है कि मनरेगा मद में 90 प्रतिशत केंद्र जबकि 10 प्रतिशत राज्य धनराशि देता है। डीडीओ ने बताया कि मजदूरों के खातों में अब धन केंद्र से पड़ता है।

इधर दूरभाष पर हुई वार्ता में सीएम रावत का कहना है कि राज्य मद में सरकार के पास पर्याप्त धन है। अब मनरेगा मद में कुशल, अकुशल और सामग्री अंश का धन सीधे केंद्र से पड़ता है। सीएम का कहना है कि मोदी सरकार प्रत्यक्ष रूप से गरीबों का शोषण करने में तुली है। केंद्र सरकार के पास मनरेगा की 31 करोड़ की उधारी चढ़ गई है। प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष नवीन ममगई, मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत सिंह भंडारी का कहना है कि मजदूरी का भुगतान नहीं होने से मजदूरों को खाने के लाले पड़ गए है।
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ब्लॉक प्रमुख गरुड़ भरत फर्स्वाण का कहना है कि मजदूरी का भुगतान नहीं होने से ग्रामीण इलाकों के विकास पर विपरीत असर पड़ रहा है। मनरेगा योजना के तहत पंचायतों को सामग्री सप्लाई करने वाले पंजीकृत दुकानदारों का कहना है कि उन्हें सामग्री अंश का भुगतान दो माह से नहीं हुआ है। दुकानदारों ने पंचायतों को सामग्री देना बंद कर दिया है। जिससे गांवों में मनरेगा की योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। 
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