सूपी को सांसद आदर्श गांव को तमगा मिले छह माह पूरे हो गए हैं, लेकिन धरातल पर किसी तरह का काम नहीं दिखाई दे रहा। न गांव में पानी की व्यवस्था हुई, न सड़कों का डामरीकरण।
स्कूलों में शिक्षकों और मोबाइल टावर के सिग्नल की बात करना तो बेमानी ही है। इसके बावजूद अफसरों का दावा है कि विकास का खाका तैयार है, जल्द गांव की तस्वीर बदली नजर आएगी।
सूपी गांव को 15 नवंबर को सांसद आदर्श गांव का ओहदा मिला था। इससे ग्रामीणों में विकास की नई उम्मीद जगी थी। नोडल अधिकारी डीएम भूपाल सिंह मनराल के निर्देश पर 17 विभागों ने विकास का खाका खींचा है।
उद्यान विभाग ने किसानों को अखरोट, आड़ू के एक हजार पौधे, पशुपालन विभाग ने लाभार्थियों में सात हजार मुर्गियां, जाली, चारे का वितरण किया है। पर्यटन विभाग ने धाकुड़ी, कौतेला के सैर को जाने वाले पर्यटकों के रात्रि विश्राम की सुविधा के लिए पांच हट स्वीकृत किए हैं।
ग्राम्या के तहत पॉलीहाउस, पशु शेड वितरण, भूमि जल संरक्षण, वानिकी के क्षेत्र में काम शुरू हो गया है। गांव की सिंचाई गूल सूखी है तो, आंगनबाड़ी केंद्र के भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। प्राइमरी से लेकर इंटर तक के स्कूल/कालेजों में प्रधानाचार्य, शिक्षकों की कमी है। कई सार्वजनिक स्टेंड पोस्ट में पानी न आने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।