जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से एंटी रैगिंग विषय पर हुई गोष्ठी में रैगिंग समस्या पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के बारे में जानकारी दी गई।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण की सचिव और सीनियर डिवीजन जज ज्योत्सना ने कहा कि रैगिंग में शामिल छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी शैक्षिक संस्थान की जिम्मेदारी है। पीड़ित के माता-पिता या अभिभावक भी आरोपी के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।
राजकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय के सभागार में जिला विधि सेवा प्राधिकरण की सचिव और सीनियर डिवीजन जज ज्योत्सना ने छात्र-छात्राओं को 2007 में उच्चतम न्यायालय के न्याय मूर्ति अरिजीत पसायत और एसएन कपाड़िया की खंडपीठ ने रैगिंग समस्या पर सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों पर दिए गए आदेश की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कानून रैगिंग पीड़ित को पूरी सहायता देगा। वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद बल्लभ उपाध्याय ने शिविर का संचालन करते हुए रैगिंग संबंधी अनेक जानकारियां दीं। जन शिक्षण संस्थान के निदेशक डा. जितेंद्र तिवारी ने एंटी रैगिंग कमेटी बनाने पर प्रकाश डाला।
डा. शरद भट्ट ने अतिथियों का स्वागत किया। डा. बीसी तिवारी ने शिविर के आयोजन के लिए प्राधिकरण की सचिव के प्रति आभार जताया। वहां डा. धनंजय शर्मा, डा. रंजन शाह और दिवाकर वर्मा आदि थे।