जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी दूर देवलेत गांव की समस्याएं भी विकास की दृष्टि से पिछड़े अन्य गांवों से कम नहीं हैं। ग्रामीणों को वाहन के लिए तीन से पांच किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। बिजली के झूलते तार जानलेवा बने हैं। नल हैं तो उनमें पीने का पानी का बूंद तक नहीं टपकता है।
गांव में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर एएनएम सेंटर तक नहीं है। इससे प्रसव पीड़िताओं को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। समस्याओं का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में गुस्सा है। देवलेत गांव में 100 परिवार अनुसूचित जाति के निवास करते हैं। सुविधाओं के नाम पर गांव में कुछ भी नजर नहीं आता है। गांव के सड़क से नहीं जुड़ने से ग्रामीणों को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। वर्षों पूर्व बने प्राइमरी पाठशाला भवन की हालत अब काफी खस्ता हो चुकी है।
जिठार नदी गांव के आसपास की उपजाऊ भूमि कटते जा रही है। लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। नदी के ऊपर पुल बनाने की मांग को भी आज तक पंख नहीं लग सके हैं। राज मिस्त्री का काम कर रहे संतोष राम का कहना है कि बारिश आते ही गांव के तुषरेड़ा से बनी पीने के पानी की लाइन ध्वस्त हो जाती है। नजदीक में जल स्रोत नहीं होने के कारण गधेरों के दूषित पानी का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ता है।