सरयू में रेत, पत्थरों के अवैध खनन के कारण लोगों में रोष हैै। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से बाढ़, भूस्खलन की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने अनियंत्रित खनन पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है।
भराड़ी, कपकोट सहित सरयू नदी के किनारे बसे गांवों में खनन के कारण बाढ़ की आशंका बनी रहती है। क्षेत्रवासियाें का कहना है कि व्यावसायिक प्रयोजन के लिए सरयू नदी में रेत, बजरी, पत्थरों का लंबे समय से खनन हो रहा है। गांसू, परमटी, तिमिलाबगड़, खाई बगड़, भराड़ी में सरयू पर खनन के कारण संवेदनशीलता बढ़ रही है।
इस क्षेत्र में पिछले साल दैवी आपदा के कारण काफी नुकसान हुआ। यहां बाढ़, भूस्खलन के कारण बहकर आने वाले रेत, पत्थरों का दोहन होने के साथ ही लगातार खनन भी जारी है। भराड़ी में बेलंग गधेरे से भी खनन के चलते खतरा बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने उपखनिजों के चुगान, खनन के लिए पट्टे जारी किए हैं, लेकिन कुछ लोग पट्टे से हटकर बाहरी क्षेत्र में भी पत्थर, रेत निकाल रहे हैं। पट्टाें की आड़ में उपखनिजों का खुलकर दोहन हो रहा है।
चीरा बगड़ के प्रधान गजेंद्र सिंह धामी का कहना है कि वह लंबे समय से सरयू में खनन पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कई सालों से खनन जारी है।
अवैज्ञानिक तरीके से रेत, पत्थर निकालने वाले भविष्य के लिए खतरा बढ़ा रहे हैं। बीडीसी सदस्य तारा सिंह दानू, राज्य आंदोलनकारी शेर सिंह ऐठानी ने प्रशासन से अवैध, अवैज्ञानिक दोहन पर रोक लगाने की मांग की है।