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पलायन ने चोरखरक गांव को वीरान कर दिया 

Fri, 15 Sep 2017 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
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चोरखरक गांव के घरों पर लगे ताले। - फोटो : अमर उजाला
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कपकोट विकास खंड के मुख्यालय से करीब 13 किमी की दूरी पर स्थित चोरखरक गांव को पलायन ने बर्बाद कर दिया है। कभी 32 परिवारों वाले इस गांव में वर्तमान में सिर्फ चार परिवार ही रह गए हैं। अच्छे खासे घरों में ताले लगे हैं। जिन खेतों में धान, मडुवा और सब्जियां लहलहाती थी, वहां अब झाड़ियां और घास ही नजर आती हैं। गांव में बचे परिवारों का कहना है कि राजनेताओं ने विकास के वादे पूरे किए होते तो ग्रामीण पलायन के लिए मजबूर ही नहीं होते। 
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कपकोट-कर्मी सड़क पर गोदियाधार से करीब चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार करके चोरखरक गांव आता है। इस गांव में पांच साल पहले 32 परिवार रहते थे। मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव होने से धीरे-धीरे लोग पलायन को मजबूर होते गए। अब सिर्फ चार ही परिवार ही गांव में रह गए हैं। अधिकतर ग्रामीण अल्मोड़ा, हल्द्वानी और दिल्ली जाकर बस गए हैं। गांव में धान, गेहूं, जौ, मसूर, मडुवा, गहत, भट और तरह-तरह की सब्जियां काफी अधिक उत्पादित होती थीं। ग्रामीणों ने गांव को सड़क से जोड़ने की मांग की, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। पिछले साल आंदोलन के बल पर गांव को सड़क से जोड़ने के लिए पोथिंग से दो किमी लंबी सड़क मंजूर हुई, लेकिन वन अधिनियम की मंजूरी का अड़ंगा अभी तक लगा हुआ है।

बच्चों की प्राइमरी शिक्षा के कोई भी कोई इंतजाम नहीं हैं। बच्चे स्कूल के लिए जान जोखिम में डालकर बरसाती गधेरों को पार कर दो किमी दूर सुलमती जाते हैं। इसके अलावा यदि किसी की अचानक तबियत खराब हो जाए तो मरीज को डोली में बैठाकर 12 किमी दूर सीएचसी कपकोट ले जाना पड़ता है। गांव में बिजली भी कभी-कभार ही आती है। रोजगार के नाम पर मनरेगा जैसी योजना का लाभ भी ग्रामीणों को कम ही मिल पाता है। पलायन के कारण गांव की करीब सात सौ नाली उपजाऊ खेत बंजर पड़े हैं। गांव में बंदर, लंगूर, सुअर और स्येही के अलावा तेंदुए का भी खतरा है। ग्रामीण चंद्र दत्त जोशी, गोवर्द्ध्रन पाठक और कैलाश पाठक बताते हैं कि राजनीतिक दलों को गांव की याद सिर्फ चुनाव के दिनों में ही आती है। उन्होंने कहा कि गांव का विकास होता तो लोग पलायन को मजबूर ही नहीं होते। जो लोग पलायन कर चले गए हैं, वह अब पूजा-पाठ और शादी समारोह में ही गांव में आते हैं। 
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वहीं, बीडीसी सदस्य प्रकाश जोशी चोरखरक गांव के रहने वाले हैं। वह गांव को फिर से बसाने में जुटे हैं। गांव में पीने के पानी के लिए लाइन नहीं थी। उन्होंने प्रयास कर पेयजल निगम से पानी की लाइन बिछवाई। खेतों में ग्राम्या के सहयोग से सेब के दो सौ पेड़ और संतरे के तीन सौ पेड़ रोपे हैं। जोशी ने बताया कि सड़क समेत अन्य समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास जारी हैं। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन सहयोग करे तो प्रवासी लोग गांव को लौटने की सोच सकते हैं। 
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 गांव के लिए मंजूर सड़क के निर्माण में बाधक वन अधिनियम की स्वीकृति दिलाने के अलावा अन्य लंबित समस्याओं के समाधान का प्रयास किए जाएंगे। 
- बलवंत भौर्याल, विधायक, कपकोट। 
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