कौसानी (बागेश्वर)। जिले के प्रवेश द्वार पर स्थित कौसानी की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्विट्जरलैंड से तुलना की थी। प्रकृति ने यहां अपना खजाना दिल खोलकर लुटाया है, लेकिन शासन-प्रशासन के इस क्षेत्र के पर्यटन को बेहतर बनाने के प्रयास नाकाफी हैं। वन विभाग की ओर से ईको पर्यटक योजना के तहत 2010 में ईको पार्क बनाने की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन बजट की कमी के कारण अब यह योजना अधर में है। वन विभाग ने तब पार्क को संवारने के लिए शासन को 42 लाख रुपये का इस्टीमेट को भेजा था जिसमें से सिर्फ 10 लाख रुपये ही मिले। बजट नहीं मिलने के कारण पार्क के प्रस्तावित कार्य ठप हैं। पार्क के नहीं संवरने से देश-विदेश से आने वाले सैलानियों में मायूसी है।
2010 में अनासक्ति आश्रम के पास देवदार और चीड़ के मिश्रित आरक्षित वन क्षेत्र में 42 लाख रुपये की लागत से ईको पर्यटक पार्क का निर्माण प्रस्तावित था। इसके निर्माण के लिए शासन ने पहली किश्त के रूप में 10 लाख रुपये मंजूर मंजूर किए। विभाग ने पार्क के लिए टिकट घर, हट्स, शौचालयों का निर्माण किया है। प्रस्ताव के अनुसार के पार्क में दूरबीन, फूलों की क्यारी, पीने के पानी की योजना, चहारदीवारी निर्माण होना था, लेकिन बजट नहीं मिलने के प्रस्तावित कार्य ठप पड़े हैं।